सीजी भास्कर, 09 मई : छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वनमंडल (Elephant Calf Death) के छाल परिक्षेत्र से एक दुखद खबर सामने आई है। सिंघीझाप स्थित घोघरा डेम में लगभग 6 माह के एक हाथी शावक की पानी में डूबने से मृत्यु हो गई। वन विभाग की टीम ने सूचना मिलते ही मौके पर मोर्चा संभाला और पोस्टमार्टम सहित अन्य वैधानिक औपचारिकताएं पूरी कीं। विभाग अब मौत के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए नमूनों को प्रयोगशाला भेज रहा है।
हाथियों के दल के साथ हुई घटना
वन विभाग (Elephant Calf Death) से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 7 मई 2026 को लगभग 20 हाथियों का एक बड़ा दल बोजिया परिसर से सिंघीझाप क्षेत्र की ओर आया था। बताया जा रहा है कि देर रात जब यह दल वापस लौट रहा था, तब हाथियों ने घोघरा डेम के पानी को पार करने की कोशिश की। इसी दौरान संभवतः पानी गहरा होने या दलदल जैसी स्थिति के कारण 6 माह का शावक खुद को संभाल नहीं पाया और उसकी डूबने से मौत हो गई। घटना के बाद हाथियों का मुख्य दल लोटान क्षेत्र की ओर बढ़ गया, हालांकि कुछ हाथी काफी समय तक वहीं पास में डटे रहे।
गश्त के दौरान मिला शव
8 मई को जब हाथी (Elephant Calf Death) ट्रैकर्स क्षेत्र की नियमित गश्त पर थे, तब उन्होंने डेम के पानी में शावक का शव तैरते हुए देखा। इसकी तत्काल सूचना वरिष्ठ वन अधिकारियों को दी गई। घटना की गंभीरता और वन्यजीव नियमों को देखते हुए, विभाग ने विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की तीन सदस्यीय टीम को मौके पर बुलाया। इस टीम में डॉ. आशीष राठिया, डॉ. विवेक नायक और डॉ. अनिल कुमार सिंह शामिल थे।
पोस्टमार्टम और आगे की जांच
विशेषज्ञों की मौजूदगी में हाथी शावक का विधिवत पोस्टमार्टम संपन्न कराया गया। हालांकि प्राथमिक तौर पर मृत्यु का कारण डूबना माना जा रहा है, लेकिन विभाग किसी भी अन्य संभावना को खारिज नहीं करना चाहता। मृत्यु के वास्तविक और तकनीकी कारणों की जांच के लिए ‘विषरा’ नमूने एकत्रित किए गए हैं। इन नमूनों को उच्च स्तरीय जांच के लिए भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) बरेली और नानाजी देशमुख वेटनरी साइंस यूनिवर्सिटी, जबलपुर के वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक विभाग भेजा जा रहा है।


