सीजी भास्कर, 8 सितंबर : मछली पालन (Fisheries Subsidy Chhattisgarh) शुरू करने की इच्छा रखने वाले ग्रामीणों और किसानों के लिए सरकारी योजना से आर्थिक मदद का रास्ता खुल रहा है। बलरामपुर जिले की दुर्गावती सिरोटिया ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का लाभ लेकर मछली पालन का अपना पुराना सपना पूरा किया है। पूंजी की कमी के कारण रुका उनका काम अब शासकीय अनुदान और विभागीय मार्गदर्शन से स्वरोजगार का जरिया बन रहा है।
बलरामपुर के ग्राम करीचलगली की दुर्गावती ने वर्ष 2025-26 में बायोफ्लॉक तालाब तैयार कराया। परियोजना लागत का 60 प्रतिशत शासकीय अनुदान उन्हें मत्स्य विभाग के माध्यम से मिला, जबकि 40 प्रतिशत राशि उन्होंने स्वयं लगाई। मछली पालन अनुदान (Fisheries Subsidy Chhattisgarh) के साथ विभाग ने उन्हें तकनीकी सहायता और जरूरी मार्गदर्शन भी दिया।
पूंजी की कमी बनी थी सबसे बड़ी रुकावट
दुर्गावती की लंबे समय से मछली पालन का व्यवसाय शुरू करने में रुचि थी। वह अपना व्यवसाय शुरू कर परिवार की आय बढ़ाना चाहती थीं। लेकिन पर्याप्त पूंजी नहीं होने के कारण उनका सपना आगे नहीं बढ़ पा रहा था। इसी दौरान उन्हें प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की जानकारी मिली और उन्होंने योजना के तहत आवेदन कर अपना काम शुरू किया।
योजना के तहत मिले अनुदान से बायोफ्लॉक तालाब तैयार होने के बाद अब दुर्गावती मछली पालन को व्यवस्थित व्यवसाय के रूप में आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। मछली पालन योजना (Fisheries Subsidy Chhattisgarh) ने उनके लिए शुरुआती निवेश का बोझ काफी कम किया है।
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5 से 6 क्विंटल मछली उत्पादन का अनुमान
बायोफ्लॉक तालाब से दुर्गावती को करीब 5 से 6 क्विंटल मछली उत्पादन की उम्मीद है। इससे लगभग एक लाख रुपये तक की आय होने का अनुमान है। उत्पादन और अनुभव बढ़ने के साथ वह भविष्य में अपने व्यवसाय का विस्तार करने की योजना भी बना रही हैं।
उनका कहना है कि आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण जिस काम को शुरू करने का सपना वर्षों से था, उसे सरकारी योजना की मदद से पूरा करने का अवसर मिला। उनके लिए यह सहायता केवल अनुदान नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
60% सरकारी अनुदान से मिला बड़ा सहारा
दुर्गावती के अनुसार, जब सरकारी योजना के साथ आर्थिक सहायता और विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन मिलता है तो सीमित संसाधनों में भी ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोजगार शुरू किया जा सकता है। उनके लिए मछली पालन अनुदान (Fisheries Subsidy Chhattisgarh) इसी अवसर का उदाहरण है।
करीचलगली में तैयार तालाब अब दुर्गावती के लिए सिर्फ मछली उत्पादन का साधन नहीं है। यह परिवार की आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता की दिशा में नई शुरुआत भी है। उनकी पहल बताती है कि सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर ग्रामीण महिलाएं अपनी रुचि और हुनर को व्यवसाय में बदल सकती हैं।
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ग्रामीणों के लिए स्वरोजगार का अवसर
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से मिले सहयोग ने दुर्गावती को अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर दिया है। मछली पालन अनुदान (Fisheries Subsidy Chhattisgarh) जैसे सरकारी सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे स्तर पर व्यवसाय शुरू करने की संभावनाएं बढ़ती हैं।
दुर्गावती की यह पहल उन लोगों के लिए भी उदाहरण है, जो पूंजी के अभाव में अपना व्यवसाय शुरू नहीं कर पा रहे हैं। सरकारी सहायता, स्वयं का निवेश और विभागीय मार्गदर्शन मिलकर ग्रामीण परिवारों के लिए आय का नया साधन तैयार कर सकते हैं।
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