सीजी भास्कर, 3 अक्टूबर : परंपरागत खेती के साथ नई तकनीक अपनाकर किसान आमदनी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। ग्राफ्टेड टमाटर की खेती (Grafted Tomato Farming) ने एक किसान को कम क्षेत्र में बेहतर उत्पादन और बाजार से अच्छी आय का अवसर दिया। करीब 40 डिसमिल जमीन में 90 क्विंटल टमाटर का उत्पादन हुआ और बिक्री से लगभग 1.35 लाख रुपये की आय मिली।
इस खेती में उन्नत पौध सामग्री के साथ वैज्ञानिक तकनीक और बेहतर फसल प्रबंधन को अपनाया गया। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत पौध सामग्री के लिए 30 हजार रुपये का अनुदान भी मिला, जिससे किसान को शुरुआती लागत में राहत मिली। तीसरे पैराग्राफ में किसान और स्थान की जानकारी सामने आती है। सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के ग्राम अमदला निवासी किसान योगेश सिंह ने मक्का की पारंपरिक खेती के साथ उद्यानिकी फसल का यह प्रयोग किया। उनके पास कुल 4.402 हेक्टेयर जमीन है।
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40 डिसमिल में 90 क्विंटल उत्पादन
योगेश सिंह ने करीब 40 डिसमिल क्षेत्र में ग्राफ्टेड टमाटर उत्पादन (Grafted Tomato Farming) शुरू किया। खेती पर लगभग 75 हजार रुपये की लागत आई। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत पौध सामग्री के लिए उन्हें 30 हजार रुपये का अनुदान मिला। उन्नत पौध सामग्री और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से करीब 90 क्विंटल टमाटर का उत्पादन हुआ। इसकी बिक्री से लगभग 1 लाख 35 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई।
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मक्का के साथ नई शुरुआत
योगेश पहले मुख्य रूप से मक्का की खेती करते थे। आमदनी बढ़ाने के लिए उन्होंने उद्यान विभाग से संपर्क किया और आधुनिक उद्यानिकी तकनीकों की जानकारी ली। विभागीय मार्गदर्शन के बाद उन्होंने ग्राफ्टेड टमाटर की उन्नत तकनीक (Grafted Tomato Farming) को अपनाने का फैसला किया। इससे पारंपरिक खेती के साथ आय के दूसरे विकल्प को भी आजमाने का अवसर मिला।
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योजना से मिली आर्थिक मदद
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत पौध सामग्री के लिए मिले 30 हजार रुपये के अनुदान ने खेती की शुरुआती लागत कम करने में मदद की। इसके साथ उद्यान विभाग की तकनीकी सलाह भी मिली। उन्नत पौध सामग्री, समय पर कृषि कार्य और बेहतर फसल प्रबंधन के जरिए योगेश ने टमाटर की आधुनिक खेती (Grafted Tomato Farming) को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया।
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किसानों को नई तकनीक का संदेश
योगेश का कहना है कि किसानों को केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। कृषि और उद्यानिकी विभाग की योजनाओं की जानकारी लेकर नई तकनीकों को आजमाया जा सकता है। गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री और वैज्ञानिक मार्गदर्शन के साथ उपलब्ध जमीन का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। ग्राफ्टेड टमाटर उत्पादन तकनीक (Grafted Tomato Farming) इसी दिशा में एक विकल्प बनकर सामने आई है।
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दूसरे किसानों को कर रहे प्रेरित
खेती से मिले परिणामों के बाद योगेश सिंह अब आसपास के किसानों को भी आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वे किसानों से उद्यान विभाग की योजनाओं की जानकारी लेने और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार नई फसलों को आजमाने की अपील करते हैं। आधुनिक टमाटर खेती (Grafted Tomato Farming) से मिले अनुभव ने योगेश को खेती में विविधता लाने का अवसर दिया है। उनका मानना है कि पारंपरिक खेती के साथ तकनीक और योजनाओं का लाभ जोड़कर किसान आमदनी के नए रास्ते तलाश सकते हैं।
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खेती में बदलाव की मिसाल
योगेश सिंह की कहानी बताती है कि सीमित क्षेत्र में भी उन्नत पौध सामग्री, तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी योजना का लाभ लेकर खेती में नया प्रयोग किया जा सकता है। मक्का की पारंपरिक खेती के साथ उन्नत ग्राफ्टेड टमाटर खेती (Grafted Tomato Farming) को जोड़कर उन्होंने 40 डिसमिल में करीब 90 क्विंटल उत्पादन हासिल किया और 1.35 लाख रुपये की आय प्राप्त की।
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