सीजी भास्कर, 20 अप्रैल : छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट (High Court Rape Verdict) की डिवीजन बेंच ने सात साल की बच्ची से दुष्कर्म के मामले में आरोपित की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि पीड़िता की गवाही भरोसेमंद और स्पष्ट हो, तो उसी के आधार पर दोषसिद्धि की जा सकती है, भले ही मेडिकल या वैज्ञानिक रिपोर्ट आरोपित के पक्ष में क्यों न हो।
मामला बेमेतरा जिले का है। बच्ची अपने माता-पिता के बाहर काम करने जाने पर गांव में अपने बड़े पिता के साथ रहती थी। एक दिन वह पड़ोसी के घर गई और देर तक वापस नहीं लौटी। उसकी बहन जब उसे लेने गई, तो उसे संदिग्ध स्थिति में पाया। घर लौटने पर बच्ची ने बताया कि पड़ोसी ने उसके साथ दुष्कर्म किया है। इस घटना (Victim Testimony Evidence) की शिकायत 17 मई 2022 को दर्ज कराई गई।
पुलिस ने आरोपित के खिलाफ धारा 376 और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया। मेडिकल जांच में कुछ स्पष्ट सबूत नहीं मिले और डीएनए रिपोर्ट भी नेगेटिव रही। बावजूद इसके, ट्रायल कोर्ट ने बच्ची और गवाहों के बयानों को विश्वसनीय मानते हुए आरोपित को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
आरोपित ने हाई कोर्ट में अपील करते हुए कहा कि उसे झूठा फंसाया गया है, गवाहों के बयान में विरोधाभास हैं और मेडिकल रिपोर्ट भी उसके खिलाफ नहीं है। उसने यह भी कहा कि वह गूंगा-बहरा और अशिक्षित है, इसलिए वह पूरी प्रक्रिया को समझ नहीं पाया। कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि मजबूत गवाही (Victim Testimony Evidence) को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि वैज्ञानिक रिपोर्ट केवल एक राय होती है और यदि प्रत्यक्ष गवाही ठोस है, तो उसे प्राथमिकता दी जाएगी। इसी आधार पर अदालत ने ट्रायल कोर्ट के फैसले (High Court Rape Verdict) को सही ठहराते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी और सजा बरकरार रखी।
अपराध पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि समाज में महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं और ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया में संवेदनशीलता बेहद जरूरी है। अदालत ने माना कि पीड़िता की सशक्त गवाही (Victim Testimony Evidence) न्याय दिलाने का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है।


