रायपुर में एक बड़े अधिकारी के आलीशान होटल में संगठित गिरोह ने लगाए 200 करोड़, काले धन से सांठ-गांठ का लगातार उतारा जा रहा कर्ज
सीजी भास्कर, 25 अक्टूबर। भिलाई इस्पात संयंत्र से कथित लोहा और स्क्रैप चोरी से अर्जित अकूत काले धन के इस्तेमाल को लेकर गंभीर दावे सामने आए हैं। शिकायतों के अनुसार, संगठित गिरोह द्वारा कथित तौर पर कुछ प्रभावशाली अधिकारियों के प्रतिष्ठानों, वैवाहिक कार्यक्रमों और नए व्यवसाय शुरू करने में आर्थिक सहयोग पहुंचाया गया।
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रायपुर के VIP रोड स्थित राम मंदिर के पास एक आलीशान होटल के निर्माण में भी इसी कथित काले कारोबार से लगभग 200 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दिए जाने का आरोप सामने आया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। लेकिन वैशाली नगर के भाजपा विधायक रिकेश सेन बहुत जल्द इस मामले और शिकायत का खुलासा करने वाले हैं। (IRON THEFT Case Bhilai)
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सूत्रों के हवाले से जानकारी मिल रही है कि वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन इस पूरे कथित नेटवर्क, धन के लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों को लेकर जल्द ही महत्वपूर्ण खुलासा कर सकते हैं। यदि दस्तावेजों से इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो मामला BSP से चोरी तक सीमित न रहकर कथित अवैध कमाई के इस्तेमाल और संभावित लाभार्थियों की भूमिका की जांच तक पहुंच सकता है। अब सबकी निगाहें विधायक के संभावित खुलासे और सीबीआई जांच पर टिकी है।
आपको बता दें कि भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) से वर्षों से जारी कथित लोहा, स्क्रैप और रेल पटरियों की चोरी का मामला अब केवल संयंत्र की सुरक्षा और आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रह गया है। इस मामले में कथित संगठित गिरोह, चोरी के माल की खरीद-बिक्री और उससे अर्जित धन के संभावित इस्तेमाल को लेकर गंभीर आरोप सामने आने का दावा किया जा रहा है।
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वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन को कुछ शिकायतकर्ताओं द्वारा दस्तावेज और साक्ष्य सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है। इन शिकायतों में कथित तौर पर कुछ अधिकारियों तक धन पहुंचने और विभिन्न निर्माण कार्यों में चोरी के माल अथवा अवैध कमाई के इस्तेमाल से संबंधित दावे किए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
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शिकायतों में दावा किए जाने की बात कही जा रही है कि BSP से लोहा और स्क्रैप बाहर निकालने तथा उसे कबाड़ियों और अन्य औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाने के लिए एक संगठित नेटवर्क सक्रिय रहा है। आरोपों के अनुसार, इस नेटवर्क को संयंत्र की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कुछ लोगों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों का कथित संरक्षण मिल सकता है। इनमें CISF, पुलिस और BSP से जुड़े कुछ अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग उठाई जा रही है।
यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल चोरी का नहीं, बल्कि औद्योगिक सुरक्षा, राष्ट्रीय संपत्ति की सुरक्षा और संभावित भ्रष्टाचार से जुड़ा गंभीर प्रकरण बन सकता है। फिलहाल किसी व्यक्ति या अधिकारी की संलिप्तता को जांच के निष्कर्ष के बिना स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।
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विधायक रिकेश सेन को सौंपी गई बताई जा रही शिकायतों में कथित अवैध कमाई के इस्तेमाल को लेकर भी गंभीर दावे किए गए हैं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, चोरी से अर्जित धन का उपयोग कुछ प्रभावशाली लोगों के निजी खर्चों, वैवाहिक आयोजनों और व्यावसायिक गतिविधियों में किए जाने की आशंका जताई गई है। इन दावों से जुड़े दस्तावेजों और रिकॉर्ड की प्रामाणिकता की जांच होना आवश्यक है।
इन शिकायतों में दिल्ली स्थित एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल के कार्यालय के निर्माण के दौरान कथित तौर पर चोरी के सरिये और लोहे की आपूर्ति तथा करोड़ों रुपये के सहयोग का दावा भी किए जाने की बात कही जा रही है। इसी तरह रायपुर के VIP रोड क्षेत्र में राम मंदिर के पास स्थित एक आलीशान होटल के निर्माण में कथित तौर पर अवैध धन के इस्तेमाल और लगभग 200 करोड़ रुपये तक की आर्थिक सहायता पहुंचाए जाने का आरोप भी चर्चा में बताया जा रहा है।
संबंधित राजनीतिक दल, होटल प्रबंधन और जिन अधिकारियों की भूमिका को लेकर आरोप लगाए जाने की बात कही जा रही है, उनका पक्ष सामने आने तथा जांच एजेंसियों द्वारा साक्ष्यों की पुष्टि किए जाने के बाद ही इन दावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

विधायक रिकेश सेन पहले भी उठा चुके हैं मामला : IRON THEFT Case Bhilai
भिलाई इस्पात संयंत्र से कथित लोहा चोरी के मामले में वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन लगातार जांच की मांग उठाते रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई सहित अन्य जांच एजेंसियों और केंद्र सरकार के शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। उनके प्रयासों के बाद राज्य सरकार द्वारा मामले को सीबीआई जांच के लिए सौंपने का निर्णय लिए जाने और इस संबंध में अधिसूचना जारी होने की जानकारी भी सामने आई है।
अब शिकायतकर्ताओं द्वारा कथित वित्तीय लेनदेन, अधिकारियों की भूमिका और चोरी के माल के संभावित इस्तेमाल से जुड़े दस्तावेज सौंपे जाने के दावों ने मामले को एक नया आयाम दिया है। हालांकि, इन दस्तावेजों की वास्तविक सामग्री, प्रमाणिकता और उनमें उल्लिखित आरोपों की पुष्टि सार्वजनिक रूप से होना अभी बाकी है।
सीबीआई जांच में खुल सकते हैं कई अहम पहलू : IRON THEFT Case Bhilai
मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच में यह स्पष्ट हो सकता है कि संयंत्र से चोरी का माल किस रास्ते बाहर निकाला जाता था, इसकी खरीद-बिक्री में कौन-कौन शामिल थे, कथित नेटवर्क को किसी स्तर पर संरक्षण मिला या नहीं और चोरी से अर्जित धन का इस्तेमाल कहां किया गया।
सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि विधायक रिकेश सेन इस पूरे प्रकरण से जुड़े कुछ दस्तावेजों के आधार पर आगे महत्वपूर्ण खुलासे कर सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो जांच के दायरे में कथित वित्तीय लेनदेन और विभिन्न स्थानों पर धन के इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान जा सकता है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि BSP से कथित तौर पर चोरी हुए लोहे और स्क्रैप का वास्तविक नेटवर्क कितना व्यापक है, इस कारोबार से किन लोगों को लाभ मिला और शिकायतों में लगाए गए आरोपों की पुष्टि किन साक्ष्यों से होती है। सीबीआई की जांच और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों से ही इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।



