सीजी भास्कर, 23 सितंबर। भाजपा के वरिष्ठ आदिवासी नेता एवं पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने अपने ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने कलेक्टर अजीत वसंत का तत्काल तबादला करने की मांग करते हुए पत्र मुख्यमंत्री, प्रदेश के मुख्य सचिव और संगठन के वरिष्ठ नेताओं को भेजा है।
इसमें कंवर ने कहा है कि कलेक्टर द्वेषपूर्ण रवैया अपनाते हुए उनके कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित कर रहे हैं। खनिज न्यास मद (डीएमएफ) में गड़बड़ी (Korba Collector Controversy) समेत कई शिकायतें पहले ही की गई थीं, पर उस पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया। चेतावनी देते हुए कंवर ने कहा कि यदि तीन दिन में मांग नहीं मानी गई तो वे शासन-प्रशासन के खिलाफ धरना देंगे।
कंवर ने पत्र में उल्लेख किया है कि कोरबा कलेक्टर वसंत की सैकड़ों अनियमितताओं (Korba Collector Controversy) की शिकायत की गई है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि व्यक्तिगत रंजिश से कार्रवाई कर संवैधानिक अधिकारों का दुरुपयोग किया जा रहा है। कंवर ने यह भी आरोप लगाया कि कलेक्टर को मुख्यमंत्री निवास के एक सचिव का संरक्षण प्राप्त है।
उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एक कार्यकर्ता की राइस मिल केवल इसलिए सील कर दी गई क्योंकि वह उनका समर्थक है। कनकी के एक कार्यकर्ता की निजी भूमि में बनी बाउंड्रीवाल को तोड़कर पेट्रोल पंप सील कर दिया गया। यही नहीं, एक पत्रकार का मकान भी बारिश के दौरान तोड़वाया गया। अब रजगामार निवासी भाजपा कार्यकर्ता अनिल चौरसिया के खिलाफ एक आदतन अपराधी से फर्जी शिकायत (Korba Collector Controversy) कराई गई है और एसईसीएल प्रबंधन पर दबाव डालकर उन्हें कब्जा खाली करने का नोटिस दिलाया गया।
पत्नी की गाड़ी टोल प्लाजा में रुकी, तो कर्मचारियों को जेल भेजा
कंवर ने आरोप लगाया कि कलेक्टर की पत्नी की गाड़ी जब मदनपुर टोल प्लाजा में रोकी गई तो नाराज होकर कलेक्टर ने कर्मचारियों को जेल भेज दिया। उन्होंने कहा कि बालको कंपनी को निजी लाभ दिलाने के लिए खनिज न्यास मद (Korba Collector Controversy) से करीब 29 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई। इसके अलावा आरोप लगाया गया कि कलेक्टर ने अपनी डॉक्टर पत्नी को सरकारी अस्पताल में भर्ती दिखाकर खनिज न्यास मद से वेतन भी दिलाया, जबकि वह चिकित्सकीय कार्य में मौजूद ही नहीं रहतीं।
कंवर ने कहा कि कांग्रेस शासनकाल में हुए भ्रष्टाचार (Korba Collector Controversy) के कारण ही उनकी सरकार चली गई। भाजपा की सरकार भ्रष्टाचार विरोधी नीति के आधार पर बनी है और इसे कायम रखने के लिए कलेक्टर पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।



