सीजी भास्कर, 11 अगस्त : रायपुर के पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई) में 15 साल के बालक के फेफड़े (Lung Surgery) की सफल सर्जरी की गई। कार्डियो थोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग में अब तक यह सबसे कम उम्र के मरीज की लोबेक्टॉमी सर्जरी बताई गई है। विभाग ने पिछले 20 दिनों में 9 और दो महीने में 13 लोबेक्टॉमी सर्जरी की हैं।
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संक्रमित फेफड़े का हिस्सा निकाला
लोबेक्टॉमी सर्जरी में फेफड़े के संक्रमित हिस्से को निकाल दिया जाता है। विभाग के एचओडी डॉ. कृष्णकांत साहू के अनुसार दो मरीजों की इमरजेंसी सर्जरी भी की गई। दोनों को खांसी के साथ अत्यधिक रक्तस्राव यानी हेमोप्टाइसिस की समस्या थी। आधुनिक तकनीक और एडवांस्ड लंग स्टेपलर की मदद से सर्जरी की गई। विभाग के मुताबिक फेफड़ों की सर्जरी के क्षेत्र में एसीआई प्रदेश में प्रमुख केंद्र के रूप में काम कर रहा है।
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20 दिन में 9 लोबेक्टॉमी सर्जरी
सीटीवीएस विभाग में पिछले 20 दिनों में 9 और दो महीने में 13 लोबेक्टॉमी सर्जरी की गई हैं। इनमें 15 साल के बालक के अलावा 70 साल के बुजुर्ग का भी ऑपरेशन किया गया। डॉक्टरों के अनुसार एडवांस तकनीक से सर्जरी करने पर ब्रोन्कोप्लूरल फिस्टुला जैसी जटिलताओं की संभावना कम हो जाती है। वैस्कुलर मालफॉर्मेशन और लंग एब्सिस जैसी स्थितियों में भी मरीजों को खून आने की समस्या हो सकती है।
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फेफड़ों की बीमारी में फंगस भी कारण
विभाग के अनुसार फेफड़ों की लोबेक्टॉमी के प्रमुख कारणों में एस्परजिलोमा और ब्रोन्किएक्टैसिस शामिल हैं। एस्परजिलोमा फेफड़ों में एस्परजिलस नाइजर नामक फंगस के संक्रमण से हो सकता है। यह समस्या टीबी से प्रभावित फेफड़ों या कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों में देखी जाती है।
ब्रोन्किएक्टैसिस भी टीबी संक्रमण के बाद होने वाली प्रमुख समस्याओं में शामिल है। इसमें फेफड़ों के अंदर असामान्य गुहाएं बन सकती हैं और संक्रमण के कारण खांसी के साथ खून आने की समस्या हो सकती है।
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समय पर इलाज से कैंसर का जोखिम कम
डॉक्टरों के अनुसार फेफड़ों के कैंसर में अगर बीमारी शुरुआती अवस्था में है तो लोबेक्टॉमी के जरिए प्रभावित हिस्से को निकालकर मरीज को बेहतर उपचार दिया जा सकता है। सीटीवीएस विभाग में लोबेक्टॉमी के अलावा डिकॉर्टिकेशन, सेगमेंटेक्टॉमी और न्यूमोनेक्टॉमी जैसी सर्जरी भी की जाती हैं।
विभाग में सालाना करीब 15 से 20 लोबेक्टॉमी सर्जरी होने की जानकारी दी गई है। फेफड़ों की सर्जरी के लिए छत्तीसगढ़ के अलावा बिहार, झारखंड, ओडिशा, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश से भी मरीज रायपुर पहुंचते हैं।
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