सीजी भास्कर, 31 जुलाई। धमतरी में बच्चों की सुरक्षा, उनके अधिकार और बेहतर परवरिश को लेकर एक विशेष कार्यशाला (Parenting Workshop) आयोजित की गई, जहां अभिभावकों को बदलते समय के अनुरूप बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही और विशेषज्ञों ने परिवार की भूमिका को सबसे महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम के दौरान पालकों से बच्चों के साथ विश्वास, संवाद और संवेदनशील व्यवहार अपनाने की अपील की गई। विशेषज्ञों का कहना था कि सुरक्षित और सकारात्मक पारिवारिक माहौल ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बनता है।

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समझदार पालक सशक्त प्रदेश कार्यशाला का आयोजन Parenting Workshop
छत्तीसगढ़ राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के दो दिवसीय धमतरी प्रवास के दौरान 28 जुलाई की शाम रूद्री रोड स्थित एक होटल में समझदार पालक सशक्त प्रदेश कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में करीब 105 लोगों ने भाग लिया, जिनमें 40 अभिभावकों ने सक्रिय रूप से सहभागिता करते हुए बच्चों के प्रभावी पालन पोषण और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।
विशेषज्ञों ने बताए बेहतर पालन पोषण के तरीके
कार्यशाला का उद्देश्य अभिभावकों को जागरूक बनाकर बच्चों के लिए सुरक्षित, सकारात्मक और संवेदनशील पारिवारिक वातावरण तैयार करना था। विशेषज्ञों ने बच्चों के मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास में माता पिता की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही प्रभावी संवाद, बच्चों की भावनाओं को समझने और व्यवहारिक प्रशिक्षण से जुड़े कई उपयोगी सुझाव भी दिए गए।
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बच्चों के लिए हर पालक निभाए जिम्मेदारी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नगर निगम महापौर रामू रोहरा ने कहा कि इस तरह के आयोजन बच्चों के सुरक्षित, स्वस्थ और संस्कारित भविष्य की मजबूत नींव रखते हैं।
राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की पहली जिम्मेदारी माता पिता की होती है। उन्होंने कहा कि हर पालक को अपने बच्चों के अधिकारों की रक्षा, संवेदनशील पालन पोषण और समग्र विकास सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने समाज से भी ऐसे बच्चों के प्रति संवेदनशील बनने की अपील की जो कठिन परिस्थितियों में जीवन बिता रहे हैं।

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मनोवैज्ञानिक ने साझा किए महत्वपूर्ण सुझाव Parenting Workshop
रायपुर से पहुंचीं मनोवैज्ञानिक डॉ. गार्गी पांडे ने कहा कि माता पिता का व्यवहार बच्चों के आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और मानसिक विकास पर गहरा प्रभाव डालता है। उन्होंने बदलते व्यवहार को समझने, बच्चों के साथ खुलकर संवाद करने और उनकी भावनाओं का सम्मान करने पर जोर दिया।
इसके अलावा दिव्यांशी शर्मा ने बच्चों के चार प्रमुख अधिकारों और राज्य बाल संरक्षण आयोग की भूमिका की जानकारी दी। जिला कार्यक्रम अधिकारी जगरानी एक्का ने भी अभिभावकों से बच्चों के प्रति संवेदनशील और सकारात्मक सोच अपनाने की अपील (Parenting Workshop) की। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी, बाल कल्याण समिति के सदस्य, जनप्रतिनिधि और अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
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रिपोर्टर : रिजवान मेमन



