सीजी भास्कर, 31 जुलाई : बिलासपुर के कथित तांत्रिक और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के करीबी माने जाने वाले कृष्ण कुमार उर्फ केके श्रीवास्तव को कथित 15 करोड़ रुपये की कमीशनखोरी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार करने के बाद विशेष अदालत ने केके श्रीवास्तव (ED Remand KK Srivastava) को 7 अगस्त तक प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिमांड पर भेज दिया है। इस दौरान एजेंसी करीब 300 करोड़ रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन, मनी ट्रेल, हवाला नेटवर्क और शेल कंपनियों के जरिए हुए ट्रांजेक्शनों की गहन जांच करेगी।
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300 करोड़ के ट्रांजेक्शन की जांच में जुटी ED
ईडी के अनुसार, जांच के दौरान कई बैंक खातों और शेल कंपनियों के माध्यम से करीब 300 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन के इनपुट मिले हैं। एजेंसी अब इन ट्रांजेक्शनों के स्रोत, लाभार्थियों और कथित मनी ट्रेल को जोड़ने में जुटी है। रिमांड के दौरान केके श्रीवास्तव से इन वित्तीय लेनदेन और उनसे जुड़े लोगों के बारे में विस्तृत पूछताछ की जाएगी।
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हवाला नेटवर्क और विदेशों में धन भेजने का आरोप
ईडी का दावा है कि कथित कमीशन की राशि हवाला नेटवर्क के जरिए अमेरिका समेत कई देशों में भेजी गई। आरोप है कि वहां शेल कंपनियों के माध्यम से धन को वैध दिखाने की कोशिश की गई। जांच एजेंसी के मुताबिक बाद में इसी रकम का उपयोग भारत में जमीन खरीदने, कंपनियों में निवेश करने और अन्य कारोबारी गतिविधियों में किया गया। फिलहाल एजेंसी पूरे वित्तीय नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
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विधानसभा थाने में भी दर्ज है अलग मामला
ईडी की कार्रवाई से पहले रायपुर के विधानसभा थाना में भी एक मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता संदीप सेठ ने आरोप लगाया कि उन्हें एक निजी कंपनी में डायरेक्टर बनाकर उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग किया गया। शिकायत के अनुसार, उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर मुंबई के विभिन्न बैंकों में खाते खोले गए, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर विदेशों से धन के लेनदेन में किया गया।
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15 करोड़ कमीशन के आरोप से शुरू हुई जांच
पूरे मामले की शुरुआत दिल्ली के कारोबारी अशोक रावत की शिकायत से हुई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि स्मार्ट सिटी और एनआरडीए (NRDA) के करीब 500 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट दिलाने के नाम पर केके श्रीवास्तव ने 15 करोड़ रुपये लिए थे। आरोप है कि प्रोजेक्ट नहीं मिलने पर रकम लौटाने का आश्वासन दिया गया, लेकिन भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद तेलीबांधा थाना में एफआईआर दर्ज हुई, जिसके आधार पर आगे ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।
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आधा दर्जन से ज्यादा शेल कंपनियां जांच के दायरे में
सूत्रों के अनुसार, जांच में केके श्रीवास्तव और उनके रिश्तेदारों से जुड़ी आधा दर्जन से अधिक शेल कंपनियों की जानकारी सामने आई है। इन कंपनियों के बैंक खातों में हुए करीब 300 करोड़ रुपये के ट्रांजेक्शन की जांच की जा रही है। ईडी यह भी पता लगा रही है कि इन कंपनियों का वास्तविक संचालन कौन करता था और कथित धन का अंतिम उपयोग कहां हुआ।
फिलहाल इस मामले की जांच ईडी, ईओडब्ल्यू (EOW) और पुलिस अलग-अलग पहलुओं से कर रही हैं। रिमांड के दौरान होने वाली पूछताछ में मामले से जुड़े अन्य लोगों और कथित वित्तीय नेटवर्क को लेकर और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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