सीजी भास्कर, 6 अक्टूबर : करीब चार दशक से चली आ रही पेंशन व्यवस्था अचानक बंद होने से सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पेंशन संकट (Pension Crisis) से जूझ रहे बुजुर्गों के लिए अब सरकार से राहत की मांग उठी है।
सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आय का बड़ा सहारा खत्म होने से 70 से 90 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पेंशनरों की चिंता बढ़ गई है। पेंशन बंद होने से रोजमर्रा के खर्च, इलाज और दूसरी जरूरतों को लेकर बुजुर्गों के सामने परेशानी खड़ी होने की बात कही जा रही है।
इसी मुद्दे को लेकर रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखा है। उन्होंने अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों के सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और कर्मचारियों की पेंशन व्यवस्था (Pension Crisis) बहाल करने की मांग की है।
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40 साल पुरानी व्यवस्था बंद
बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि अनुदान प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों में लंबे समय तक सेवा देने वाले प्राध्यापकों और कर्मचारियों को करीब 40 वर्षों से पेंशन और सेवानिवृत्ति संबंधी लाभ मिलते रहे हैं।
विभागीय आदेश क्रमांक 38-2, दिनांक 12 अक्टूबर 2010 के तहत पांचवें वेतनमान के आधार पर यह व्यवस्था लागू थी। अब उच्च शिक्षा विभाग के 1 सितंबर 2026 के आदेश क्रमांक 18649/2026/38-2 के जरिए इस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। सांसद ने इस फैसले पर चिंता जताते हुए पेंशन बंद होने (Pension Crisis) के मामले में मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है।
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बुजुर्गों के सामने आर्थिक संकट
पेंशन व्यवस्था खत्म होने से सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सामने आर्थिक असुरक्षा की स्थिति बनने की बात सांसद ने पत्र में कही है। इन कर्मचारियों ने अपनी पूरी सेवा उच्च शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में लगाई है।
ऐसे में सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाली नियमित पेंशन बंद होने से उनके सामने रोजमर्रा के खर्च और दूसरे जरूरी भुगतान को लेकर परेशानी बढ़ सकती है। सांसद ने इसे संवेदनशील मामला बताते हुए सरकार से राहत की मांग की है।
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70 से 90 साल के पेंशनर
बृजमोहन अग्रवाल ने पत्र में बताया कि वर्तमान में अधिकांश पेंशनर 70 से 90 वर्ष या उससे अधिक आयु के हैं। इस उम्र में नियमित आय का महत्व और बढ़ जाता है। इलाज, दवाइयों और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पेंशन पर निर्भर बुजुर्गों के लिए व्यवस्था बंद होना बड़ी चिंता का विषय है। सांसद ने पेंशनरों की परेशानी (Pension Crisis) को मानवीय दृष्टिकोण से देखने का आग्रह किया है।
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आदेश रद्द करने की मांग
सांसद ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से उच्च शिक्षा विभाग के नए आदेश को तत्काल निरस्त करने या उस पर रोक लगाने के निर्देश देने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा है कि पात्र सेवानिवृत्त प्राध्यापकों और कर्मचारियों को पूर्व स्वीकृत व्यवस्था के अनुसार पेंशन और ग्रेज्युटी का लाभ मिलना चाहिए। इससे रिटायर कर्मचारियों की पेंशन (Pension Crisis) दोबारा जारी हो सकेगी और बुजुर्गों को राहत मिलेगी।
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ग्रेज्युटी भुगतान जारी रखने की अपील
बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री से पात्र सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन के साथ ग्रेज्युटी का भुगतान भी पूर्व व्यवस्था के अनुसार जारी रखने की मांग की है। उनका कहना है कि लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों को जीवन के इस पड़ाव पर आर्थिक सुरक्षा मिलना जरूरी है। इसी आधार पर उन्होंने सरकार से पेंशन बहाली की मांग (Pension Crisis) पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है।
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बोले- कुछ तो करिए सरकार
करीब 40 वर्षों से चली आ रही पेंशन व्यवस्था बंद होने का मामला अब सरकार के सामने पहुंच गया है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर बुजुर्ग पेंशनरों के हित में तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। उन्होंने पत्र में पेंशन को बुजुर्गों के जीवन का आधार बताते हुए सरकार से राहत देने की अपील की है। अब इस पेंशन विवाद (Pension Crisis) पर सरकार की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, इस पर नजर रहेगी।
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