सीजी भास्कर, 30 मई : छत्तीसगढ़ की ‘माटी’ में गरीब, लाचार और बेघर परिवारों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरने और उनके सपनों के आशियाने को हकीकत में बदलने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक बहुत बड़ा और आक्रामक वित्तीय धमाका कर दिया है। प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) की रफ्तार को बुलेट ट्रेन की गति देने के लिए राज्य शासन ने चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के लिए एकमुश्त 2677.15 करोड़ रुपये की भारी-भरकम केंद्रीय और राज्यांश राशि सीधे जारी कर दी है। इस ऐतिहासिक आवंटन के बाद पूरे प्रदेश के प्रशासनिक अमले में (PMAYG CG Allocation 2026) को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं, क्योंकि मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि रसूखदारों की फाइलों को छोड़कर सबसे पहले अंतिम छोर के जरूरतमंद व्यक्ति को पक्के सम्मानजनक घर की चाबी सौंपी जाएगी।
दरअसल, यह पूरा मामला केवल बजट जारी करने का नहीं है, बल्कि गरीबों के आत्मसम्मान और उनकी सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील और मानवीय विषय है। राजधानी रायपुर में इस बड़ी वित्तीय मंजूरी की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कड़े और भावुक शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के “हर गरीब को पक्का घर” के संकल्प को छत्तीसगढ़ में शत-प्रतिशत पूरा करना हमारी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
उन्होंने अधिकारियों को दोटूक निर्देश दिए हैं कि एसएनए स्पर्श (SNA SPARSH) मॉड्यूल के माध्यम से आवंटित की गई इस पूरी राशि का उपयोग बिना किसी भ्रष्टाचार या लेटलतीफी के, पारदर्शी तरीके से सीधे पात्र हितग्राहियों के बैंक खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जाए। इस व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सरकार ने अब एक बड़ा कदम (PMAYG CG Allocation 2026) उठा लिया है।
ढाई साल में 10.60 लाख घरों का रिकॉर्ड
छत्तीसगढ़ में इस योजना के जो प्रगति आंकड़े सामने आए हैं, वे वाकई देश के अन्य बड़े-बड़े राज्यों को चौंकाने वाले हैं। साय सरकार के आने के बाद प्रदेश में प्रतिदिन 1600 से अधिक मूसलाधार गति से पक्के आवासों का निर्माण पूरा किया जा रहा है। पिछले ढाई वर्षों के भीतर ही छत्तीसगढ़ की धरती पर रिकॉर्ड 10.60 लाख से अधिक गरीब परिवारों के मकानों को पूरी तरह पूर्ण कराकर उनके गृह प्रवेश की रस्म पूरी कराई जा चुकी है। अकेले वित्तीय वर्ष 2025-26 में ही 6 लाख से अधिक आवासों का निर्माण कर छत्तीसगढ़ पूरे देश में नंबर वन पायदान की रेस में शामिल रहा है। पूर्ववर्ती व्यवस्थाओं में हुए नुकसान (PMAYG CG Allocation 2026) और आवासों की पेंडेंसी को खत्म करते हुए मुख्यमंत्री ने इस योजना के पूरे ढर्रे को आक्रामक तरीके से बदल कर रख दिया है।
इस पूरी योजना के भीतर का सबसे खूबसूरत और क्रांतिकारी सस्पेंस यह है कि यह अभियान केवल सीमेंट और ईंटों की चारदीवारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए छत्तीसगढ़ के ग्रामीण परिवेश की आजीविका और महिला सशक्तीकरण में एक युगांतकारी बदलाव (CG Hasdeo Forest Controversy) देखने को मिल रहा है। प्रदेश की 10 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) की दीदियां इस योजना के तहत निर्माण सामग्री जैसे ईंट, रेत और कंक्रीट की सीधे आपूर्ति कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और तेजी से ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। महिलाओं को रोजगार का मुख्य जरिया बनाकर सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को चलाने का एक नया नियम (PMAYG CG Allocation 2026) जमीन पर स्थापित कर दिया है।
सरेंडर नक्सलियों को पक्के मकान
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस योजना में बस्तर के वनांचल क्षेत्रों के लिए एक विशेष और संवेदनशील क्लॉज भी जोड़ा है। राज्य सरकार आत्मसमर्पित (सरेंडर) नक्सलियों और नक्सल प्रभावित पीड़ित परिवारों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पक्के सुरक्षित आवास आवंटित कर रही है, ताकि बंदूक छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले परिवारों के जीवन में सुरक्षा और विश्वास का एक नया वातावरण तैयार किया जा सके। इसके साथ ही, एक बड़े नवाचार (इन्नोवेशन) के तहत प्रदेश के 1.5 लाख से अधिक नवनिर्मित प्रधानमंत्री आवासों में ‘रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम’ को अनिवार्य रूप से इनबिल्ट किया गया है, जिससे ग्रामीण इलाकों में जल संरक्षण को अभूतपूर्व बढ़ावा मिल रहा है।
अब सबसे बड़ा सस्पेंस और प्रशासनिक चुनौती यह है कि क्या 2677 करोड़ रुपये की इस भारी-भरकम राशि के जारी होने के बाद निचले स्तर पर बैठे भ्रष्ट अधिकारी और बिचौलिए गरीबों के हक के पैसों में सेंधमारी कर पाएंगे? इस पर कड़ा प्रहार करते हुए साय सरकार ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश की हर ग्राम पंचायत में ‘क्यूआर कोड’ (QR Code) प्रदर्शित कर दिए हैं, जिससे कोई भी ग्रामीण सीधे अपने मोबाइल से योजना का स्टेटस देख सकता है। साथ ही, किसी भी प्रकार की शिकायत या रिश्वतखोरी के त्वरित निराकरण के लिए सरकार ने टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-233-1290 भी जारी कर दिया है। बहरहाल, सरकार के इस बड़े फैसले ने यह तो साफ कर दिया है कि छत्तीसगढ़ में अब सुशासन और संवेदनशीलता की गति (PMAYG CG Allocation 2026) रुकने वाली नहीं है, और आने वाले दिन प्रदेश के लाखों बेघर परिवारों के जीवन में एक सुरक्षित और सम्मानजनक सवेरा लेकर आने वाले हैं।




