सीजी भास्कर, 21 अगस्त : सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। सावन महीने के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली पुत्रदा एकादशी को संतान सुख और संतान से जुड़ी परेशानियों के निवारण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार सावन की पुत्रदा एकादशी (Putrada Ekadashi 2026) का व्रत 23 अगस्त 2026, रविवार को रखा जाएगा।
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23 अगस्त को रखा जाएगा व्रत
एकादशी तिथि का प्रारंभ 23 अगस्त 2026, रविवार को सुबह 2 बजे से होगा। वहीं इसका समापन 24 अगस्त 2026, सोमवार को सुबह 4 बजकर 18 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार व्रत 23 अगस्त को ही रखा जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपतियों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करने से संतान के जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं।
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पूजा का शुभ मुहूर्त
पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा के लिए शुभ समय 23 अगस्त को सुबह 7 बजकर 23 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप और व्रत कथा का पाठ किया जा सकता है।
Putrada Ekadashi 2026 के दिन भगवान विष्णु के साथ सावन मास के कारण भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है। भक्त इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ पूजा-अर्चना करते हैं।
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कब होगा व्रत का पारण?
पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण 24 अगस्त 2026, सोमवार को किया जाएगा। दिए गए मुहूर्त के अनुसार पारण का समय दोपहर 1 बजकर 41 मिनट से शाम 4 बजकर 16 मिनट तक रहेगा।
व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को पारण के समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उचित समय पर व्रत खोलना महत्वपूर्ण माना जाता है।
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पुत्रदा एकादशी का धार्मिक महत्व
सावन की पुत्रदा एकादशी को संतान सुख की कामना से जुड़े व्रतों में महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि आती है और संतान से जुड़ी परेशानियों से मुक्ति की कामना पूरी होती है।
एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की भक्ति और आत्मसंयम का पर्व भी माना जाता है। सावन में पड़ने के कारण पुत्रदा एकादशी (Putrada Ekadashi 2026) का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
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पुत्रदा एकादशी की पूजा विधि
व्रत के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु के सामने दीपक जलाकर तुलसी पत्र, पीले फूल, फल और पंचामृत अर्पित करें। भगवान विष्णु की पूजा के बाद पुत्रदा एकादशी की व्रत कथा सुनें।
इस दिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या फल का दान भी किया जा सकता है।




