सीजी भास्कर, 18 जुलाई : अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े राम मंदिर चढ़ावा विवाद (Ram Mandir Donation Controversy) को लेकर सियासत तेज हो गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। दोनों नेताओं ने कहा है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में पूरी पारदर्शिता जरूरी है और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए।
अयोध्या में सामने आए इस विवाद को लेकर कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को प्राप्त नकद, सोना, चांदी और अन्य प्रकार के चढ़ावे के प्रबंधन की व्यापक जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान का उपयोग किस प्रकार किया गया, इसकी जानकारी सार्वजनिक होना आवश्यक है ताकि लोगों का विश्वास बना रहे।
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Ram Mandir Donation Controversy चढ़ावे के प्रबंधन पर उठे सवाल
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने पत्र में कहा कि देशभर से लाखों श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण और धार्मिक कार्यों के लिए आस्था के साथ दान दिया है। ऐसे में यदि चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या गड़बड़ी के आरोप सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होना लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनविश्वास दोनों के लिए आवश्यक है।
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कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि ट्रस्ट के खातों का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए और जांच पूरी होने के बाद उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। उनका कहना है कि इससे श्रद्धालुओं को यह भरोसा मिलेगा कि उनके द्वारा दिया गया दान सही उद्देश्य के लिए उपयोग किया गया है।
सरकार की जवाबदेही का भी उठाया मुद्दा
पत्र में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन की घोषणा संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी और इसके सदस्यों की नियुक्ति भी केंद्र सरकार की ओर से की गई। ऐसे में ट्रस्ट से जुड़े गंभीर आरोपों पर केंद्र सरकार की जवाबदेही बनती है।
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उन्होंने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इतने महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामले में सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ पद, प्रभाव या राजनीतिक पहचान की परवाह किए बिना सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
श्रद्धालुओं की आस्था का भी किया जिक्र
कांग्रेस नेताओं ने पत्र में कहा कि देशभर के करोड़ों लोगों ने अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ राम मंदिर के लिए दान दिया था। ऐसे में यदि चढ़ावे के उपयोग को लेकर सवाल उठते हैं तो यह केवल वित्तीय मामला नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं और विश्वास से भी जुड़ा विषय है। इसलिए पूरे मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है।
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SIT कर रही है मामले की जांच
दूसरी ओर, इस मामले की जांच विशेष जांच दल (SIT) द्वारा की जा रही है। जांच एजेंसी कथित वित्तीय अनियमितताओं और चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़े आरोपों की पड़ताल कर रही है। न्यायालय के निर्देशों के अनुसार जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। फिलहाल जांच प्रक्रिया जारी है और एजेंसी उपलब्ध दस्तावेजों व अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।
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राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्ष जहां स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है, वहीं अब सभी की नजर जांच एजेंसी की रिपोर्ट और सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।



