सीजी भास्कर, 20 सितंबर। स्कूलों में शनिवार को उस समय हड़कंप मच गया जब जिला शिक्षा अधिकारी (School Inspection) पर निकले। डीईओ डॉ. संजय गुहे बीईओ बलौदाबाजार राजेंद्र टंडन के साथ औचक दौरे पर पहुंचे। निरीक्षण के दौरान कई प्राचार्य, शिक्षक और लिपिक अनुपस्थित पाए गए, जबकि उपस्थित शिक्षक भी अपने कर्तव्य में गंभीर लापरवाही बरतते मिले। इस पर नाराज होकर जिला शिक्षा अधिकारी ने प्राचार्य व लिपिक सहित 12 शिक्षकों को नोटिस जारी कर दो दिन के भीतर जवाब मांगा।
सबसे पहले निरीक्षण का पड़ाव शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खटियापाटी रहा। यहां सुबह 9 बजे तक केवल चार व्याख्याता मौजूद थे जबकि तीन व्याख्याता और एक सहायक ग्रेड-2 अनुपस्थित मिले। अनुपस्थित कर्मचारियों में व्याख्याता एलबी शकुंतला ध्रुव, रविकुमार साहू, गजेन्द्र प्रसाद ध्रुव और सहायक ग्रेड-2 मनीषा विश्वास शामिल हैं। इस दौरान जब समय-सारिणी के अनुसार दूसरा पीरियड चल रहा था, तब छात्र-छात्राएं कक्षा के बजाय बाहर घूम रहे थे और शिक्षक कार्यालय में बैठे नजर आए। इस लापरवाही पर डीईओ (School Inspection) ने कड़ी नाराजगी जताई और प्राचार्य हेमराम ध्रुव सहित कई शिक्षकों को नोटिस जारी किया।
इसके बाद शासकीय हाईस्कूल सुढ़ेला का निरीक्षण हुआ। यहां प्रभारी प्राचार्य संतरू सिंह पैकरा पिछले छह दिनों से बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित पाए गए। रिकॉर्ड में यह भी सामने आया कि पूरे माह में उन्होंने केवल तीन दिन ही स्कूल में उपस्थिति दर्ज की है। शेष दिनों में या तो अवकाश लिया गया या निजी कार्य का बहाना किया गया। यही नहीं, सहायक ग्रेड-2 रजनी शर्मा और सहायक ग्रेड-3 दुर्गा देवी ध्रुव भी लगातार दो दिन से अनुपस्थित थीं। इस स्थिति को देखते हुए डीईओ (School Inspection) ने कहा कि लंबे समय से अनुपस्थित शिक्षकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक शाला सुढ़ेला में मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता भी परखी गई। भोजन कक्ष, रसोई व्यवस्था और बच्चों को परोसे जाने वाले खाने का बारीकी से निरीक्षण हुआ। डीईओ ने रसोइयों को स्पष्ट निर्देश दिया कि छात्रों को हमेशा साफ और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाए।
पूरे औचक निरीक्षण (School Inspection) ने यह साबित कर दिया कि शिक्षा विभाग अब कड़ाई से नियम लागू करने जा रहा है। अनुपस्थित पाए गए प्राचार्य, व्याख्याता और लिपिक को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है। इसके अलावा जिन स्कूलों में लापरवाही बरती गई, वहां के जिम्मेदारों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
डीईओ (School Inspection) का यह दौरा न केवल उपस्थिति जांचने तक सीमित रहा बल्कि इसने शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर भी उजागर की। प्रशासन ने साफ किया है कि भविष्य में भी ऐसे निरीक्षण नियमित रूप से होंगे और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस औचक दौरे के बाद जिलेभर के शिक्षकों में खलबली मच गई है। अब देखना होगा कि नोटिस का जवाब किस तरह दिया जाता है और आगे कार्रवाई कितनी सख्त होती है। फिलहाल इतना तय है कि (School Inspection) के इस कदम से जिले की शिक्षा व्यवस्था में जिम्मेदारी और अनुशासन का नया अध्याय जुड़ गया है।



