सीजी भास्कर, 9 सितंबर : दूरदराज के इलाकों में चल रहे एकल शिक्षकीय स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए प्रशासन ने नई व्यवस्था शुरू करने का फैसला लिया है। अब योग्य स्थानीय युवाओं को स्कूलों में पढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाएगी। खास तौर पर गणित और विज्ञान जैसे विषयों की कक्षाओं के लिए स्थानीय युवाओं की भर्ती (Single Teacher School Bilaspur) की जाएगी।
एक महीने में भर्ती पूरी
मामला बिलासपुर जिले के दूरदराज क्षेत्रों में संचालित एकल शिक्षकीय स्कूलों का है। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने टीएल बैठक में अधिकारियों को स्कूलों के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया एक महीने के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए हैं। संकुल स्तर पर होने वाली शिक्षकों की भर्ती (Single Teacher School Bilaspur) में स्थानीय योग्य युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
इन युवाओं को पढ़ाने के लिए डीएमएफ फंड से पीरियड के आधार पर मानदेय दिया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य ऐसे स्कूलों में शिक्षकों की कमी को जल्द दूर करना है, जहां एक ही शिक्षक के भरोसे बच्चों की पढ़ाई चल रही है।
750 स्कूलों में स्मार्ट क्लास
बैठक में जिले की स्मार्ट क्लास व्यवस्था (Single Teacher School Bilaspur) की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि करीब 750 स्कूलों में स्मार्ट टीवी के माध्यम से बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। कलेक्टर ने पढ़ाई को नियमित रखने और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी कदम जल्द उठाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा में किसी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए। दूरस्थ क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ तकनीकी संसाधनों का प्रभावी उपयोग भी जरूरी है।
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680 से ज्यादा निर्माण कार्य
जिले में 230 आंगनबाड़ी भवन, 125 पीडीएस दुकान और 325 स्कूल टॉयलेट के निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं। कलेक्टर ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण में लापरवाही या घटिया गुणवत्ता किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्कूलों से जुड़े निर्माण कार्यों की निगरानी के साथ शिक्षा व्यवस्था में सुधार (Single Teacher School Bilaspur) पर भी प्रशासन का जोर है। अधिकारियों को तय समयसीमा और गुणवत्ता के मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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24 कार्यालय प्रमुखों को नोटिस
ई-ऑफिस व्यवस्था की समीक्षा के दौरान करीब 24 कार्यालय प्रमुखों की उपलब्धि शून्य पाई गई। इस पर संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं डीसीएस सर्वे में जिले में अब तक करीब 39 प्रतिशत काम पूरा होने की जानकारी बैठक में दी गई।
बैठक में बाढ़ और आपदा की स्थिति से निपटने की तैयारियों की भी समीक्षा हुई। नदी-नालों और बड़े बांधों के आसपास रहने वाले कुशल स्थानीय तैराकों को ‘जलमित्र’ बनाया जाएगा (Single Teacher School Bilaspur)। इन्हें बचाव कार्य का प्रशिक्षण और जरूरी उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि आपदा के समय स्थानीय स्तर पर तत्काल मदद मिल सके।
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