सीजी भास्कर, 8 अक्टूबर : प्रधान आरक्षक तालिब शेख की पत्नी और नाबालिग बेटी की नृशंस हत्या (Surajpur Triple Death Penalty) के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट ने मुख्य दोषी कुलदीप साहू, चंद्रकांत उर्फ सीके चौधरी और रिंकू सिंह को फांसी की सजा सुनाई है। वहीं चौथे दोषी आर्यन उर्फ गोल्डी विश्वकर्मा को मृत्यु पर्यंत कारावास दिया गया है।
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दोहरे हत्याकांड में तीन दोषियों को फांसी
सूरजपुर में हुए इस दोहरे हत्याकांड (Surajpur Triple Death Penalty) में न्यायाधीश आनंद प्रकाश वरियाल की अदालत ने फैसला सुनाया। मामले में दो अन्य आरोपितों को साक्ष्य के अभाव में पहले ही दोषमुक्त किया जा चुका है। अभियोजन के अनुसार घटना 13 अक्टूबर 2024 की रात की है। आदतन अपराधी कुलदीप साहू का प्रधान आरक्षक तालिब शेख से पुराना विवाद था। इसी रंजिश में उसने शहर में हंगामा किया और पुलिसकर्मियों से भी विवाद किया था।
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घर में घुसकर पत्नी और बेटी की हत्या
अभियोजन के अनुसार कुलदीप साहू अपने तीन साथियों के साथ प्रधान आरक्षक तालिब शेख के किराए के मकान में घुसा। उस समय प्रधान आरक्षक घर पर नहीं थे। आरोप है कि घर में घुसने के बाद आरोपितों ने उनकी पत्नी के साथ दुष्कर्म किया और फिर चाकू व कैंची से हमला कर मां-बेटी की हत्या कर दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिला के शरीर पर धारदार हथियार से 37 वार और नाबालिग बेटी के शरीर पर 28 वार के निशान मिले थे। हत्या के बाद दोनों शवों को घटनास्थल से दूर पीढ़ा गांव में फेंक दिया गया था।
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सूरजपुर में फैला था भारी आक्रोश
दोहरे हत्याकांड (Surajpur Triple Death Penalty) के बाद पूरे सूरजपुर में आक्रोश फैल गया था। लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया था। पुलिस ने अलग-अलग स्थानों से आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। घटना के बाद तत्कालीन कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को भी हटा दिया गया था। कठिन समय में आईपीएस प्रशांत सिंह ठाकुर को सूरजपुर का पुलिस अधीक्षक बनाया गया था। उनके दिशा-निर्देश में मामले की जांच और साक्ष्य संकलन किया गया।
कुलदीप पर पहले से दर्ज थे कई मामले
दोषी कुलदीप साहू के खिलाफ इस घटना से पहले भी दो दर्जन से अधिक आपराधिक प्रकरण दर्ज होने की बात सामने आई थी। घटना के बाद उसकी फांसी की मांग को लेकर लोगों ने प्रदर्शन किया था। उसके अवैध निर्माण को भी जमींदोज किया गया था। पुलिसकर्मियों पर वाहन चढ़ाकर कुचलने के प्रयास से जुड़े मामले में अदालत ने 28 सितंबर 2026 को कुलदीप साहू को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। सजा सुनाए जाने के बाद अदालत से बाहर निकलते समय उसके हंसने का वीडियो भी प्रसारित हुआ था।
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सूरजपुर में पहली फांसी की सजा
अभियोजन ने मामले को विरल से विरलतम श्रेणी का बताया था। अदालत ने हत्या को अत्यंत क्रूर और सुनियोजित बताते हुए तीन दोषियों को मृत्युदंड और एक को मृत्यु पर्यंत कारावास की सजा सुनाई। यह फैसला (Surajpur Triple Death Penalty) छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद सूरजपुर न्यायालय में फांसी की सजा सुनाए जाने का पहला प्रकरण है। वहीं सरगुजा संभाग में एक ही अपराध में तीन लोगों को एक साथ फांसी की सजा सुनाए जाने का भी यह पहला मामला बताया गया है। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय हत्या के एक मामले में सूरजपुर में फांसी की सजा सुनाई गई थी।
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