सीजी भास्कर, 4 अक्टूबर : सामूहिक मेहनत और सही तरीके से की गई खेती ग्रामीण महिलाओं के लिए आमदनी का मजबूत जरिया बन रही है। मौसमी सब्जियों की खेती से महिलाओं ने करीब डेढ़ से दो लाख रुपए की आय अर्जित की है। सब्जी उत्पादन से आमदनी (Vegetable Farming SHG) बढ़ने के साथ परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में भी मदद मिल रही है।
पहले खेती तक सीमित रहने वाली इन महिलाओं ने समूह से जुड़ने के बाद सब्जी उत्पादन को अतिरिक्त आय के साधन के रूप में अपनाया। खेती की योजना, नियमित देखभाल और समय पर बिक्री से उन्हें बेहतर आमदनी हासिल हुई।
यह सफलता मुंगेली जिले के ग्राम अमलीडीह के शीतला स्व-सहायता समूह की महिलाओं की है। समूह की अध्यक्ष मंजू साहू के अनुसार महिलाओं ने ककड़ी समेत विभिन्न मौसमी सब्जियों की खेती की, जिससे करीब डेढ़ से दो लाख रुपए तक की आय हुई।

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ककड़ी समेत सब्जियों की खेती
समूह की महिलाओं ने सामूहिक रूप से ककड़ी और अन्य मौसमी सब्जियों का उत्पादन किया। खेती के दौरान फसल की नियमित देखभाल और समय पर जरूरी कृषि कार्य किए गए। बेहतर योजना और समय पर विपणन से तैयार सब्जियों को बाजार तक पहुंचाया गया। मौसमी सब्जियों की खेती (Vegetable Farming SHG) से महिलाओं को पारंपरिक खेती के मुकाबले अतिरिक्त आमदनी का अवसर मिला।
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दो लाख तक की आय
शीतला स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने सब्जी उत्पादन से करीब डेढ़ से दो लाख रुपए तक की आय अर्जित की। इस कमाई ने समूह की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद की है। समूह की अध्यक्ष मंजू साहू ने बताया कि पहले महिलाएं मुख्य रूप से पारंपरिक खेती तक सीमित थीं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने व्यावसायिक सब्जी उत्पादन (Vegetable Farming SHG) को आजीविका गतिविधि के रूप में आगे बढ़ाया।
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परिवार की जरूरतों में खर्च
सब्जी की खेती से मिली अतिरिक्त आय का उपयोग महिलाएं परिवार की जरूरतों को पूरा करने में कर रही हैं। बच्चों की शिक्षा, घरेलू खर्च और कृषि गतिविधियों के विस्तार में भी इस आमदनी का इस्तेमाल किया जा रहा है। आय बढ़ने के साथ महिलाओं की परिवार के आर्थिक फैसलों में भागीदारी भी बढ़ी है। सब्जी खेती से महिला सशक्तिकरण (Vegetable Farming SHG) को भी बढ़ावा मिला है।
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समूह से बढ़ा आत्मविश्वास
स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं को सामूहिक रूप से काम करने का अवसर मिला। इससे खेती की योजना बनाने, उत्पादन करने और तैयार उपज के विपणन में सहयोग मिला। समूह की गतिविधियों से महिलाओं में आत्मविश्वास भी बढ़ा है। महिला समूह की खेती (Vegetable Farming SHG) अब परिवार की आय बढ़ाने के साथ उनके लिए आत्मनिर्भरता का माध्यम बन रही है।
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आजीविका का नया जरिया
जिला प्रशासन की ओर से स्व-सहायता समूहों को आजीविका गतिविधियों से जोड़ने और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है। अमलीडीह की महिलाओं का अनुभव बताता है कि सामूहिक प्रयास, बेहतर फसल प्रबंधन और बाजार से जुड़ाव के जरिए खेती को आय का प्रभावी जरिया बनाया जा सकता है। लाभकारी सब्जी उत्पादन (Vegetable Farming SHG) से शीतला समूह की महिलाएं आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रही हैं।
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