सीजी भास्कर, 26 जून : राजधानी के तालाबों की लगातार बिगड़ती स्थिति अब पर्यावरण और जल संरक्षण (Water Crisis Raipur) के लिए गंभीर चुनौती बन गई है। नगर निगम की नियमित देखरेख के अभाव और लोगों द्वारा प्लास्टिक कचरा फेंके जाने से शहर के अधिकांश तालाब जलकुंभी और गंदगी से पट चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में राजधानी में जल संकट और भूजल स्तर में गिरावट की समस्या और गंभीर हो सकती है।
जलकुंभी और कचरे से घट रही जल संचयन क्षमता
रायपुर में 100 से अधिक छोटे-बड़े तालाब हैं, जो वर्षों से भूजल पुनर्भरण (रीचार्ज) का प्रमुख स्रोत रहे हैं। लेकिन वर्तमान में अधिकांश तालाब प्लास्टिक कचरे, जलकुंभी और गंदे नालों के पानी से प्रभावित हैं। इससे न केवल तालाबों की जल संग्रहण क्षमता कम हो रही है, बल्कि बारिश का पानी भी जमीन में पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पा रहा है। जल विशेषज्ञों के अनुसार, यही कारण है कि कई इलाकों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है।
700 से 1000 फीट तक पहुंचा भूजल स्तर
विशेषज्ञों का कहना है कि तालाबों के किनारों पर बढ़ते सीमेंटकरण और प्राकृतिक जल निकासी मार्गों के बाधित होने से भूजल रिचार्ज प्रभावित हुआ है। कई क्षेत्रों में पानी के लिए 700 से 1000 फीट तक बोरिंग करनी पड़ रही है, जो भविष्य में जल उपलब्धता को लेकर गंभीर संकेत माना जा रहा है।
प्रमुख तालाबों की हालत बेहद खराब
राजधानी के पेंठु तालाब, खोखो तालाब और राजा तालाब सहित कई प्रमुख जलाशय जलकुंभी और कचरे से ढक चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से नियमित सफाई नहीं होने के कारण तालाबों से दुर्गंध आने लगी है और उनका प्राकृतिक स्वरूप लगातार खत्म हो रहा है। कई स्थानों पर गंदे नालों का पानी सीधे तालाबों में गिरने से जल प्रदूषण की स्थिति और गंभीर हो गई है।
जल संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
नगर निगम का कहना है कि तालाबों की नियमित सफाई और संरक्षण के लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। इसके साथ ही नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा। जल विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे। तालाबों में कचरा फेंकने पर रोक, जलकुंभी की नियमित सफाई और वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देकर ही भूजल स्तर में सुधार लाया जा सकता है।
विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
जल विशेषज्ञों के अनुसार, तालाब केवल जलाशय नहीं बल्कि शहर के प्राकृतिक भूजल रिचार्ज सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यदि इनका संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाले समय में पेयजल संकट और भी गहरा सकता है। विशेषज्ञों ने प्रशासन और आम नागरिकों से तालाबों को प्रदूषण मुक्त रखने तथा जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की अपील की है।



