सीजी भास्कर , 17 अप्रैल
लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान (131वां संशोधन) विधेयक सरकार पास नहीं करा पाई। इस बिल में संसद की मौजूदा 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान शामिल था।करीब 21 घंटे की लंबी चर्चा के बाद इस पर वोटिंग हुई, जिसमें कुल 528 सांसदों ने भाग लिया। इनमें से 298 वोट पक्ष में और 230 वोट विपक्ष में पड़े। हालांकि, बिल को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी, जो 352 वोट के बराबर था। इस तरह सरकार को 54 वोट से हार का सामना करना पड़ा और बिल गिर गया।सीटों और बहुमत का गणितलोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, लेकिन 3 सीटें खाली होने के कारण मौजूदा सांसदों की संख्या 540 है। इसी आधार पर बहुमत का गणित तय किया गया।दो अन्य बिल वोटिंग के लिए नहीं लाए गएसरकार ने दो अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को वोटिंग के लिए पेश नहीं किया—
1. परिसीमन संशोधन संविधान बिल 20262. केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026सरकार का कहना था कि ये दोनों बिल एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं, इसलिए इन पर अलग से वोटिंग की आवश्यकता नहीं है।राजनीतिक बयानबाज़ी तेजविपक्ष ने इस घटनाक्रम को अपनी जीत बताया।राहुल गांधी ने कहा कि यह संविधान पर हुए हमले को रोकने की जीत है।प्रियंका गांधी ने इसे लोकतंत्र और देश की एकता की बड़ी जीत बताया।शशि थरूर ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए कहा कि इसे परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।एमके स्टालिन ने सरकार पर निशाना साधते हुए राजनीतिक बयान दिया।
सरकार और विपक्ष में टकरावप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह सहित सरकार के कई नेताओं ने विपक्ष से बिल का समर्थन करने की अपील की थी। पीएम मोदी ने अलग-अलग मौकों पर सांसदों से समर्थन और भागीदारी की अपील की।अमित शाह ने लोकसभा में कहा था कि अगर यह बिल पास नहीं होता तो इसकी जिम्मेदारी विपक्ष की होगी और देश की महिलाएं इसका जवाब देंगी।महिला आरक्षण बिल के गिरने के बाद संसद में राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। विपक्ष इसे अपनी जीत बता रहा है, जबकि सरकार ने इसे गंभीर राजनीतिक असहमति का परिणाम बताया है।


