सीजी भास्कर, 06 मई : छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा (Kutra Medical College) जिले के वासियों के लिए स्वास्थ्य क्रांति की एक बड़ी और बेहद सुखद खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशानुरूप जिले में नए शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय (मेडिकल कॉलेज) को इसी सत्र से शुरू करने की तैयारियां युद्ध स्तर पर जारी हैं। नए सत्र में एमबीबीएस (MBBS) के प्रथम बैच के दाखिले के लिए अगले महीने नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की टीम का निरीक्षण प्रस्तावित है। इस परीक्षा में खरा उतरने के लिए जिला प्रशासन दिन-रात एक कर तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है, जिससे जिले में (Medical College) (मेडिकल कॉलेज) के शुरू होने का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।
वैकल्पिक भवन तैयार: लाइवलीहुड कॉलेज और जिला अस्पताल का हो रहा कायाकल्प
चूंकि स्थायी परिसर बनने में समय लगेगा, इसलिए तात्कालिक रूप से कॉलेज (Kutra Medical College) शुरू करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था को अंतिम रूप दे दिया गया है। पठन-पाठन और छात्रों के रहने के लिए स्थानीय लाइवलीहुड कॉलेज एवं हॉस्टल भवन को चिन्हांकित कर वहां जरूरी मरम्मत और अपग्रेडेशन का काम अंतिम चरण में है। एनएमसी के नियमों के अनुसार संबद्ध अस्पताल में न्यूनतम 220 बिस्तरों (Beds) की जरूरत होती है। जिला चिकित्सालय जांजगीर में वर्तमान में 180 बेड संचालित हैं, जबकि शेष 40 बेड की अतिरिक्त व्यवस्था को भी लगभग पूरा कर लिया गया है। शासन द्वारा मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक और शैक्षणिक नेतृत्व के लिए डीन (Dean) की नियुक्ति पहले ही की जा चुकी है, जिससे प्रशासनिक कामों में तेजी आई है।
कुटरा में 357 करोड़ की लागत से बन रहा
अस्थायी व्यवस्था के साथ-साथ जांजगीर-चांपा के ग्राम कुटरा में मेडिकल कॉलेज (Kutra Medical College) के विशाल और आधुनिक स्थायी परिसर का निर्माण कार्य भी पूरी रफ्तार से चल रहा है। राज्य शासन ने इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए 357 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की है। इसके अतिरिक्त, वैकल्पिक परिसर के सुचारू संचालन और वहां आधुनिक संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए जिला खनिज न्यास संस्थान (DMF) मद से भी आवश्यक वित्तीय मंजूरी दी गई है।
डीएम कर रहे हैं पल-पल की मॉनिटरिंग
मेडिकल कॉलेज को सुचारू रूप से चलाने के लिए केवल इमारतों का होना काफी नहीं है, इसलिए मानव संसाधन की कमी को भी तेजी से दूर किया जा रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टरों, प्रोफेसरों सहित तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में है। राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बाकी बचे तकनीकी स्टाफ की उपलब्धता के लिए चिकित्सा शिक्षा आयुक्त, नवा रायपुर से लगातार पत्राचार किया जा रहा है।
जांजगीर-चांपा कलेक्टर जन्मेजय महोबे खुद इस पूरे प्रोजेक्ट की नियमित मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने निर्माण एजेंसियों को सख्त हिदायत दी है कि एनएमसी के कड़े मानकों और गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस (Medical College) (मेडिकल कॉलेज) के शुरू होते ही जांजगीर और आसपास के लाखों ग्रामीणों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बिलासपुर या रायपुर की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।


