सीजी भास्कर, 22 मई। आरक्षण और क्रीमी लेयर को लेकर शुक्रवार को सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) में हुई सुनवाई के दौरान ऐसी टिप्पणी सामने आई जिसने नई बहस छेड़ दी। अदालत में सामाजिक न्याय, अवसर और आरक्षण के दायरे को लेकर लंबी चर्चा हुई। सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणी के बाद कानूनी और सामाजिक हलकों में इस मुद्दे पर बातचीत तेज हो गई।
सुनवाई के दौरान अदालत ने खास तौर पर उन परिवारों का जिक्र किया जो आर्थिक और सामाजिक रूप से काफी आगे बढ़ चुके हैं। अदालत की टिप्पणी के बाद यह सवाल फिर चर्चा में आ गया कि आरक्षण का लाभ किन लोगों तक पहुंचना चाहिए और इसकी सीमा क्या होनी चाहिए।
अदालत ने क्या कहा : Supreme Court
सुप्रीम अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि माता पिता दोनों आईएएस अधिकारी हैं तो उनके बच्चों को आरक्षण की जरूरत क्यों होनी चाहिए। अदालत ने यह सवाल पिछड़े वर्गों में क्रीमी लेयर से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान उठाया।
क्रीमी लेयर पर हुई चर्चा
सुनवाई के दौरान समृद्ध और सामाजिक रूप से आगे बढ़ चुके परिवारों को मिलने वाले आरक्षण लाभ पर चर्चा हुई। अदालत ने संकेत दिया कि जो परिवार पहले ही शिक्षा और आर्थिक स्तर पर मजबूत स्थिति में पहुंच चुके हैं, उनके लिए आरक्षण की आवश्यकता पर विचार होना चाहिए।
सामाजिक गतिशीलता का भी उठा मुद्दा
अदालत ने सामाजिक गतिशीलता का जिक्र करते हुए कहा कि आरक्षण का उद्देश्य उन लोगों को आगे (Supreme Court) लाना है जो अब भी पीछे हैं। सुनवाई में इस बात पर भी चर्चा हुई कि आरक्षण का लाभ वास्तविक जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे यह सुनिश्चित करना जरूरी है।
देशभर में फिर शुरू हुई बहस
अदालत की इस टिप्पणी के बाद आरक्षण व्यवस्था और क्रीमी लेयर को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। कानूनी और सामाजिक विशेषज्ञ अब इस टिप्पणी को भविष्य की नीति और न्यायिक सोच से जोड़कर देख रहे हैं।



