सीजी भास्कर, 13 जून : विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर Child Labour Rescue अभियान के तहत छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने प्रदेशभर में बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 20 बच्चों को संरक्षण में लिया है। राजधानी रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र स्थित एक फैक्ट्री में छापेमारी कर 9 नाबालिग बच्चों को जोखिमपूर्ण कार्य करते हुए मुक्त कराया गया। वहीं बिलासपुर और रायपुर रेलवे क्षेत्र से भी 11 बच्चों का रेस्क्यू किया गया।
Child Labour Action उरला की फैक्ट्री में मिला बाल श्रम
आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में रायपुर के उरला स्थित मारुति नंदन स्ट्रक्चर इंडस्ट्रीज में औचक निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान पाया गया कि लोहे की फैक्ट्री में नाबालिग बच्चों से गंभीर और जोखिमपूर्ण कार्य कराया जा रहा था। मौके पर ही 9 बच्चों को संरक्षण में लेकर नियमानुसार कार्रवाई की गई तथा उन्हें बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
ओडिशा, यूपी और बंगाल के बच्चे मिले
प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि रेस्क्यू किए गए बच्चे ओडिशा, उत्तर प्रदेश के बरेली और पश्चिम बंगाल के आसनसोल के निवासी हैं। बच्चों ने बताया कि उन्हें एक ठेकेदार के माध्यम से रायपुर लाया गया था, जो बिहार का रहने वाला है।
मामले में संबंधित ठेकेदार और बच्चों को यहां तक पहुंचाने वाले अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। अधिकारियों को बाल तस्करी की आशंका भी नजर आ रही है, जिसके सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच शुरू कर दी गई है।
Child Trafficking Investigation : बाल तस्करी के एंगल से होगी जांच
आयोग के अनुसार मामले में बच्चों के साथ क्रूरता, शोषण और अवैध रूप से जोखिमपूर्ण कार्य कराए जाने के तथ्य प्रथम दृष्टया सामने आए हैं। इस आधार पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75, 79 और 143 के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
साथ ही बाल श्रम और संभावित बाल तस्करी से जुड़े अन्य कानूनी पहलुओं की भी विस्तृत जांच की जा रही है। बच्चों के परिजनों से संपर्क स्थापित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

रेलवे स्टेशनों से भी 11 बच्चों का रेस्क्यू
कार्रवाई के दौरान बिलासपुर में आरपीएफ की मदद से 7 बच्चों तथा रायपुर जीआरपी के माध्यम से 4 बच्चों को संरक्षण में लिया गया। इस तरह प्रदेशभर में कुल 20 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू कर संरक्षण प्रदान किया गया है।

डॉ. वर्णिका शर्मा ने कही बड़ी बात
आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बाल श्रम बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है, विशेष रूप से तब जब उनसे जोखिमपूर्ण उद्योगों में काम कराया जाए। प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सम्मानजनक जीवन का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि बाल श्रम और बाल तस्करी जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ आयोग पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

पुनर्वास और सहायता की प्रक्रिया शुरू
रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को आवश्यक संरक्षण, परामर्श, चिकित्सकीय सहायता और पुनर्वास की प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है। कार्रवाई में जिला बाल संरक्षण अधिकारी संजय निराला, विपिन ठाकुर, श्रम विभाग की टीम और अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।




