सीजी भास्कर, 03 जुलाई : बिलासपुर बिजली संकट (Bilaspur Power Crisis) और लगातार हो रही बिजली कटौती को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) ने कड़ा रुख अपनाया है। मामूली आंधी-बारिश के बाद घंटों तक रहने वाले ब्लैकआउट और शहर में चरमराई बिजली व्यवस्था पर मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने स्वत: संज्ञान लेते हुए ऊर्जा विभाग और बिजली कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को निर्धारित की गई है।
आधे घंटे की आंधी के बाद पूरी रात अंधेरे में डूबा शहर
सोमवार शाम तेज आंधी और बारिश के बाद बिलासपुर के अधिकांश इलाकों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। कई क्षेत्रों में रात करीब तीन बजे तक ब्लैकआउट की स्थिति बनी रही। लंबे समय तक बिजली नहीं आने से नाराज नागरिक नेहरू नगर स्थित बिजली विभाग के जोन कार्यालय पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन किया।
कई फीडर ठप, खंभे गिरे और 11 केवी लाइन हुई क्षतिग्रस्त
आंधी के कारण सरकंडा के बंधवापारा फीडर, महर्षि स्कूल फीडर, ओम नगर, सिंधी कॉलोनी, वेयरहाउस क्षेत्र और शेफर स्कूल सहित कई प्रमुख फीडर प्रभावित हो गए। कई स्थानों पर बिजली के खंभे उखड़ गए, इंसुलेटर फट गए और कलेक्टर बंगले के पास पेड़ गिरने से 11 केवी की मुख्य लाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई।
तकनीकी खराबी और ट्रांसफार्मर फेल होने से बढ़ी मुश्किल
बृहस्पति बाजार सब स्टेशन में तकनीकी खराबी आने से देर रात तक मरम्मत कार्य प्रभावित रहा। कई इलाकों में ट्रांसफार्मर खराब होने के कारण मंगलवार तक केवल आंशिक रूप से बिजली आपूर्ति बहाल हो सकी। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्तमान में बिलासपुर प्रदेश के सबसे अधिक बिजली संकट झेलने वाले शहरों में शामिल हो गया है।
स्टाफ की कमी का हवाला दे रहा बिजली विभाग
बिजली विभाग के अधिकारियों ने स्वीकार किया कि विभाग लंबे समय से कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। आपात स्थिति में पूरे शहर की व्यवस्था संभालने के लिए केवल तीन मरम्मत टीमें उपलब्ध थीं, जिनमें कुल 12 कर्मचारी तैनात थे। एक साथ कई स्थानों पर फॉल्ट आने के कारण मरम्मत कार्य में देरी हुई और बिजली आपूर्ति सामान्य होने में कई घंटे लग गए।
मीडिया रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान
बिलासपुर बिजली संकट (Bilaspur Power Crisis) और आम लोगों की परेशानी से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने इसे जनहित का विषय माना और स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू कर दी।
वरिष्ठ अधिकारियों से मांगा व्यक्तिगत शपथपत्र
हाईकोर्ट ने ऊर्जा विभाग के सचिव, बिलासपुर नगर निगम आयुक्त और छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को व्यक्तिगत शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने पूछा है कि शहर में निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं तथा भविष्य में इस प्रकार की स्थिति रोकने के लिए क्या कार्ययोजना तैयार की गई है।



