सीजी भास्कर, 25 जुलाई : छत्तीसगढ़ में आकाशीय बिजली और करंट से हो रही मौतों (Lightning Deaths in Chhattisgarh) पर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य शासन और छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) से सवाल किया कि आम लोगों की सुरक्षा के लिए सिर्फ कागजी आदेश जारी किए जा रहे हैं या जमीनी स्तर पर भी कोई ठोस कार्रवाई हो रही है।
मांगी स्टेटस रिपोर्ट Lightning Deaths in Chhattisgarh
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पूछा कि बिजली हादसों की रोकथाम के लिए प्रस्तावित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) की क्या स्थिति है। कोर्ट ने सीएसपीडीसीएल को निर्देश दिए।
आकाशीय बिजली और करंट से हो रही मौतों (Lightning Deaths in Chhattisgarh) को रोकने के लिए अब तक उठाए गए कदमों की विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट 18 अगस्त तक पेश की जाए। मामले की अगली सुनवाई भी 18 अगस्त को होगी।
बिजली कंपनी के हलफनामे में सामने आया बड़ा खुलासा
हाई कोर्ट के 6 जुलाई 2026 के आदेश के पालन में ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव और सीएसपीडीसीएल के प्रबंध निदेशक ने व्यक्तिगत शपथ पत्र पेश किया।
इसमें बताया गया कि छत्तीसगढ़ स्टेट इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई कोड-2011 के क्लॉज 5.35 के तहत पहले नए बिजली कनेक्शन या वायरिंग पूरी होने के बाद लाइसेंसी ठेकेदार की टेस्ट रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य था, लेकिन 2 मार्च 2026 को जारी आदेश के जरिए इस अनिवार्य व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया।
हाई-लेवल कमेटी बनाएगी एसओपी
राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि बिजली हादसों की रोकथाम और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए 20 जुलाई 2026 को एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है।
इस समिति में सीएसपीडीसीएल के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ राज्य के इलेक्ट्रिकल इंस्पेक्टर को भी शामिल किया गया है। समिति सुरक्षा मानकों के लिए एसओपी तैयार करेगी।
फेंसिंग में करंट और लापरवाही बनी हादसों की वजह
सीएसपीडीसीएल के हलफनामे के मुताबिक, करंट से होने वाली अधिकांश मौतें खेतों और बाड़ों में अवैध रूप से करंट प्रवाहित करने तथा सुरक्षा मानकों का पालन किए बिना किए गए निर्माण कार्यों के कारण हो रही हैं।
कंपनी ने बताया कि आकाशीय बिजली और करंट से हो रही मौतों (Lightning Deaths in Chhattisgarh) को रोकने के लिए सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी सेफ्टी रेगुलेशन-2023 और विद्युत अधिनियम-2003 के तहत वरिष्ठ अधिकारियों को इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑफिसर नियुक्त किया गया है। साथ ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
असर फाइलों में नहीं, मैदान में दिखना चाहिए
हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि केवल सर्कुलर जारी करने या कमेटियां बना देने से जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती। अदालत ने सरकार और बिजली कंपनी से पूछा कि बिजली ढांचे की नियमित जांच, रखरखाव, सुरक्षा मानकों के पालन और एसओपी के क्रियान्वयन के लिए अब तक कौन-कौन से ठोस कदम उठाए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था का असर कागजों पर नहीं, जमीनी स्तर पर दिखाई देना चाहिए।



