गरियाबंद कलेक्टर कार्यालय के ठीक सामने राष्ट्रपिता की प्रतिमा बदहाल, आखिर जिम्मेदार कौन?
जहाँ से रोज गुजरते हैं कलेक्टर, एसपी और जिले के तमाम अफसर… वहीं उपेक्षा का शिकार महात्मा गांधी की प्रतिमा
सीजी भास्कर, 30 जुलाई। गरियाबंद जिला मुख्यालय में स्थित कलेक्टर परिसर के सामने स्थापित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा इन दिनों बदहाल स्थिति में दिखाई (Mahatma Gandhi) दे रही है। जिस प्रतिमा के सामने राष्ट्रीय पर्वों पर माल्यार्पण कर प्रशासन गांधी जी के विचारों और स्वच्छता, सत्य एवं अहिंसा के संदेश को याद करता है, उसी प्रतिमा की वर्तमान हालत प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
प्रतिमा का रंग कई स्थानों से उखड़ चुका है। जगह-जगह दरारें स्पष्ट दिखाई देती हैं। पुराने सूखे फूल-मालाएँ और कपड़े जैसी सामग्री लंबे समय से गले में लटकी हुई हैं, जो सम्मान के बजाय उपेक्षा का प्रतीक प्रतीत होती हैं। आसपास की साफ-सफाई और रखरखाव की स्थिति भी संतोषजनक नहीं दिखती।

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सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह कोई दूरस्थ गाँव या उपेक्षित सार्वजनिक स्थल नहीं, बल्कि गरियाबंद कलेक्टर कार्यालय का मुख्य परिसर है। इसी मार्ग से जिले के कलेक्टर भगवान सिंह उईके, पुलिस अधीक्षक, विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी प्रतिदिन गुजरते हैं। ऐसे में राष्ट्रपिता की प्रतिमा की यह स्थिति केवल सौंदर्य का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का भी विषय बन गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जिला प्रशासन के सबसे महत्वपूर्ण परिसर में स्थित प्रतिमा का यह (Mahatma Gandhi) हाल है, तो जिले के अन्य सार्वजनिक स्थलों के रखरखाव की स्थिति का सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। लोगों में यह चर्चा भी है कि क्या अब “बापू भी भगवान भरोसे हैं?”
यहाँ एक और संयोग चर्चा का विषय बना हुआ है—जिले के कलेक्टर का नाम भगवान सिंह है। ऐसे में लोग व्यंग्य करते हुए पूछ रहे हैं कि क्या राष्ट्रपिता की प्रतिमा को अब सचमुच “भगवान सिंह की नजर” का इंतजार है, या फिर ऊपर वाले भगवान के भरोसे ही छोड़ दिया गया है?
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महात्मा गांधी केवल एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक और नैतिक चेतना के प्रतीक हैं। उनके सम्मान से जुड़ा हर सार्वजनिक स्थल प्रशासन की जवाबदेही और समाज की संवेदनशीलता को दर्शाता है। प्रतिमा की उपेक्षा केवल पत्थर या रंग-रोगन की समस्या नहीं, बल्कि उस सम्मान से जुड़ा प्रश्न है जो राष्ट्र अपने को देता है।
प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि वह तत्काल पहल करते हुए –
* प्रतिमा की मरम्मत,
* रंग-रोगन,
* साफ-सफाई,
* परिसर का सौंदर्यीकरण,
* तथा सम्मानजनक नियमित रखरखाव
सुनिश्चित करे, ताकि राष्ट्रपिता की गरिमा बनी रहे और जिला मुख्यालय एक सकारात्मक संदेश दे सके।
अब देखने वाली बात यह होगी कि गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह उईके इस मुद्दे पर कितनी गंभीरता दिखाते (Mahatma Gandhi) हैं। क्या प्रशासन शीघ्र कार्रवाई कर बापू को उनका उचित सम्मान दिलाएगा, या फिर यह बदहाल प्रतिमा आने वाले दिनों में भी प्रशासनिक उदासीनता की मूक गवाही देती रहेगी?
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रिपोर्टर – आशुतोष सिंह



