सीजी भास्कर, 30 जुलाई : अनुसूचित जनजाति और वन अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (Dharti Aba Janjatiya Gram Utkarsh Abhiyan) के तहत प्रदेश के 160 गांवों का चयन किया जाएगा। इन गांवों में सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन और प्रबंधन के लिए विशेष योजनाएं तैयार कर लागू की जाएंगी।
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ग्रामसभाओं को मिलेगी 15 लाख रुपये की स्वीकृति
आदिम जाति विभाग की ओर से संबंधित जिलों के कलेक्टरों को जारी पत्र में बताया गया है कि चयनित प्रत्येक ग्रामसभा को सामुदायिक वन संसाधन संरक्षण एवं प्रबंधन योजना (CFRMP) के बेहतर क्रियान्वयन के लिए 15 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस राशि का उपयोग वन संसाधनों के संरक्षण, प्रबंधन और आजीविका से जुड़े कार्यों में किया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य वन अधिकार अधिनियम-2006 (Forest Rights Act) के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ ग्रामसभाओं को अधिक अधिकार और जिम्मेदारी देना है।
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ग्रामसभा के माध्यम से होगा योजना का संचालन
योजना के तहत प्रत्येक चयनित गांव में सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति ग्रामसभा के माध्यम से योजना के संचालन और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालेगी। इसके लिए ग्रामसभा के नाम से राष्ट्रीयकृत बैंक में सिंगल करंट अकाउंट खोला गया है, ताकि योजना से जुड़ी राशि का उपयोग पारदर्शी तरीके से किया जा सके।
क्लस्टर आधारित गांवों का होगा चयन
आदिम जाति विभाग ने कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि 160 गांवों का चयन क्लस्टर आधारित और आपस में जुड़े क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए किया जाए। इससे योजनाओं का बेहतर संचालन और निगरानी सुनिश्चित हो सकेगी। चयनित गांवों में सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन योजना तैयार कर उसे लागू किया जाएगा, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों की भागीदारी को प्राथमिकता दी जाएगी।
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तकनीकी संस्थाओं की ली जाएगी मदद
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार तकनीकी सहयोगी संस्थाओं, सिविल सोसायटी संगठनों और स्थानीय संस्थाओं की सेवाएं भी ले सकेगी। इन संस्थाओं का चयन ग्रामसभा के प्रस्ताव और विधिवत अनुमोदन के बाद किया जाएगा। ये संस्थाएं ग्रामसभाओं को वन संसाधन संरक्षण योजना बनाने, उसके क्रियान्वयन और निगरानी में सहयोग करेंगी।
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वन संरक्षण के साथ बढ़ेगी ग्रामीण आजीविका
आदिम जाति विभाग के अधिकारियों के अनुसार, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (Dharti Aba Janjatiya Gram Utkarsh Abhiyan) से वन अधिकार कानून का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन होगा। साथ ही ग्रामसभाओं की भूमिका मजबूत होगी और वन आधारित आजीविका के नए अवसर भी विकसित होंगे। सरकार का मानना है कि सामुदायिक भागीदारी से जंगलों का संरक्षण बेहतर तरीके से किया जा सकेगा और आदिवासी समुदायों को आर्थिक रूप से भी मजबूती मिलेगी।
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