सीजी भास्कर, 31 जुलाई। छत्तीसगढ़ में Fake Paneer को लेकर सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। लगातार मिल रही शिकायतों और जांच के बाद प्रदेश में एनालॉग पनीर की बिक्री पर रोक लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि इस संबंध में जल्द ही आधिकारिक आदेश जारी किया जाएगा।
पिछले एक साल के दौरान रायपुर में संदिग्ध और नकली पनीर के कई मामलों का खुलासा हुआ। लगातार हुई कार्रवाई के बाद सरकार ने अब सख्त कदम उठाने का फैसला लिया है। माना जा रहा है कि इससे उपभोक्ताओं को सुरक्षित डेयरी उत्पाद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

एनालॉग पनीर पर सरकार का बड़ा फैसला Fake Paneer
स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, प्रदेश में एनालॉग पनीर की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार का कहना है कि यदि किसी उत्पाद को असली पनीर बताकर बेचा जाता है, जबकि वह दूध से तैयार नहीं है, तो यह उपभोक्ताओं के साथ धोखा है।
पिछले एक साल में रायपुर में कई जगह छापेमारी कर बड़ी मात्रा में संदिग्ध पनीर जब्त किया गया। लगातार सामने आ रहे मामलों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी थी।
रायपुर में 4200 किलो संदिग्ध पनीर पर कार्रवाई
जुलाई 2025 में बिरगांव स्थित काशी एग्रो फूड्स फैक्ट्री से करीब 2500 किलो संदिग्ध पनीर जब्त कर यूनिट को सील किया गया था।
हाल ही में खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने रायपुर की एक अन्य फैक्ट्री में छापा मारकर करीब 1700 किलो पनीर के सैंपल जांच के लिए भेजे। इस तरह पिछले एक साल में करीब 4200 किलो संदिग्ध पनीर के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है।
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क्या होता है एनालॉग पनीर
एनालॉग पनीर दूध से तैयार नहीं किया जाता। इसे पाम ऑयल, स्किम्ड मिल्क पाउडर, स्टार्च और अन्य प्रोसेस्ड सामग्री मिलाकर बनाया जाता है।
इसकी लागत असली पनीर की तुलना में काफी कम होती है। इसलिए कुछ होटल, ढाबे और फूड कारोबार में इसका इस्तेमाल लागत घटाने के लिए किया जाता है। हालांकि इसे असली पनीर बताकर बेचना नियमों का उल्लंघन माना जाता है।
180 रुपए में तैयार होता है एक किलो
रायपुर के शंकर नगर स्थित एक यूनिट संचालक रामानंद बाघ के मुताबिक उन्होंने एनालॉग उत्पाद बनाने का लाइसेंस लिया हुआ है।
उनका कहना है कि एक किलो एनालॉग पनीर तैयार करने में करीब 180 रुपए खर्च आता है, जबकि इसे बाजार में 200 से 250 रुपए प्रति किलो तक बेचा जाता है।
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रायपुर में कई यूनिट हैं सक्रिय
जानकारी के मुताबिक रायपुर में करीब 15 बड़ी यूनिट एनालॉग पनीर तैयार कर रही हैं। इनमें अधिकांश बीरगांव, टाटीबंध और सिलतरा के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थित हैं।
इन इकाइयों में पाम ऑयल और मिल्क पाउडर की मदद से बड़ी मात्रा में उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जिन्हें कई जगह डेयरी उत्पाद के रूप में बेचा जाता है।
विशेषज्ञों ने दी स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी
डायटीशियन नेहा जैन के अनुसार, एनालॉग या आर्टिफिशियल पनीर दिखने में असली पनीर जैसा हो सकता है, लेकिन इसे प्राकृतिक तरीके से तैयार नहीं किया जाता।
उन्होंने बताया कि इसमें प्रोसेस्ड सामग्री का उपयोग होता है। लंबे समय तक ऐसे उत्पादों का सेवन हृदय, लीवर और अन्य अंगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। इसलिए उपभोक्ताओं को खरीदते समय उत्पाद की सही जानकारी जरूर जांचनी चाहिए।
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