सीजी भास्कर, 05 अगस्त : बिलासपुर-कोरबा नेशनल हाईवे (Bilaspur Korba Highway Accident) पर एक तेज रफ्तार ट्रेलर की चपेट में आने से 9 मवेशियों की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक नंदी गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद ग्रामीणों और गौसेवकों में आक्रोश है। लोगों ने हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, फेंसिंग लगाने और गति सीमा तय करने की मांग की है। यह घटना ऐसे समय हुई है, जब हाईकोर्ट पहले ही सड़कों पर आवारा मवेशियों की समस्या को लेकर राज्य सरकार और संबंधित एजेंसियों को कई बार निर्देश दे चुका है।
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गतौरी के पास हुआ हादसा, एक नंदी का रेस्क्यू
हादसा (Bilaspur Korba Highway Accident) कोनी थाना क्षेत्र के गतौरी के पास हुआ। सुबह राहगीरों और ग्रामीणों ने सड़क पर कई मवेशियों को मृत और घायल अवस्था में देखा, जिसके बाद पुलिस और गौसेवकों को सूचना दी गई।
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मौके पर पहुंची टीम ने गंभीर रूप से घायल नंदी का रेस्क्यू कर उसे छतौना स्थित गौरी गोपाल गौसेवा धाम भेजा, जहां उसका इलाज जारी है। वहीं, मृत 9 मवेशियों का अंतिम संस्कार गौसेवकों की मौजूदगी में कराया गया।
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हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद भी नहीं बदले हालात
सड़कों पर आवारा मवेशियों की बढ़ती संख्या को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका पर लगातार सुनवाई चल रही है। न्यायालय राज्य सरकार और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को कई बार प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दे चुका है, लेकिन इसके बावजूद हाईवे पर मवेशियों की मौत के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और आवारा मवेशियों के संरक्षण को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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फेंसिंग, स्पीड लिमिट और गौ एम्बुलेंस की मांग
हादसे (Bilaspur Korba Highway Accident) के बाद सामाजिक संगठनों और गौसेवकों ने नेशनल और स्टेट हाईवे पर सुरक्षात्मक फेंसिंग, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में स्पीड लिमिट, प्रत्येक जिले में गौ एम्बुलेंस की व्यवस्था तथा आवारा मवेशियों के लिए स्थायी गौशाला और चारे की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
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गौसेवकों का कहना है कि यदि समय रहते स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो ऐसे हादसे लगातार होते रहेंगे, जिससे मवेशियों के साथ-साथ वाहन चालकों और यात्रियों की जान भी खतरे में पड़ती रहेगी।
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