सीजी भास्कर, 05 अगस्त : खरीफ सीजन के बीच गरियाबंद जिले में खाद संकट (Fertilizer Crisis Gariaband) गहरा गया है। सहकारी समितियों में डीएपी (DAP) और यूरिया का स्टॉक लगभग खत्म होने से किसान परेशान हैं। हालात ऐसे हैं कि सीमावर्ती गांवों के किसान अब अपनी फसलों को बचाने के लिए पड़ोसी राज्य ओडिशा से महंगे दामों पर खाद खरीदने को मजबूर हो गए हैं। किसानों का आरोप है कि सरकारी व्यवस्था फेल होने का फायदा खाद माफिया और निजी कारोबारी उठा रहे हैं।
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सोसायटियों में खत्म हुआ स्टॉक
गरियाबंद के ओडिशा सीमा से लगे तेतलखुटी और धूगियामुड़ा सहित कई गांवों में सरकारी सहकारी समितियों में खाद (Fertilizer Crisis Gariaband) नहीं मिलने से किसान सीधे ओडिशा का रुख कर रहे हैं। सीमा पार से साइकिल, मोटरसाइकिल और चारपहिया वाहनों के जरिए खाद लगातार छत्तीसगढ़ लाया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी वितरण व्यवस्था कमजोर पड़ने के कारण सीमावर्ती इलाकों में खाद की अनौपचारिक सप्लाई और तस्करी तेजी से बढ़ गई है।
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सरकारी रेट छोड़ कई गुना ज्यादा वसूली
किसानों का आरोप है कि संकट का फायदा उठाकर निजी डीलर और बिचौलिए मनमाने दाम वसूल रहे हैं। यूरिया की सरकारी कीमत करीब 266 रुपये प्रति बोरी है, लेकिन निजी बाजार में यह 800 से 1,000 रुपये तक बेची जा रही है। डीएपी (DAP), जो सहकारी समितियों में उपलब्ध नहीं है, उसके लिए किसानों से 2,000 से 2,200 रुपये प्रति बोरी तक वसूले जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें महंगी कीमत पर खाद खरीदनी पड़ रही है, क्योंकि समय पर खाद नहीं मिलने से पूरी फसल प्रभावित हो सकती है।
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खरीफ सीजन पर मंडराया संकट
धान की बोआई और रोपाई का समय चल रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस समय फसलों को समय पर उर्वरक (Fertilizer Crisis Gariaband) नहीं मिला तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा। यही वजह है कि किसान किसी भी कीमत पर खाद खरीदने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि यदि जल्द ही सहकारी समितियों में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं कराई गई तो खरीफ फसल का उत्पादन प्रभावित होगा और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।
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प्रशासन से कार्रवाई की मांग Fertilizer Crisis Gariaband
स्थानीय किसानों ने प्रशासन से सहकारी समितियों में तत्काल पर्याप्त मात्रा में डीएपी और यूरिया उपलब्ध कराने, खाद की कालाबाजारी पर रोक लगाने तथा सीमा पर हो रही अवैध बिक्री और तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो इसका सीधा असर प्रदेश के धान उत्पादन पर पड़ेगा।
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