सीजी भास्कर, 29 जुलाई : छत्तीसगढ़ में किसानों की आय बढ़ाने के लिए अब पारंपरिक फसलों के साथ औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती (Medicinal Farming) को बढ़ावा दिया जा रहा है। कम लागत और कम पानी में अधिक मुनाफा देने वाली इस खेती से किसानों को आर्थिक मजबूती मिल रही है। धमतरी जिले के दुगली में 30 जुलाई को आयोजित कार्यक्रम में नारायणपुर और धमतरी के औषधीय खेती से जुड़े किसानों को 54 लाख 36 हजार रुपये की अग्रिम प्रोत्साहन राशि वितरित की जाएगी।
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कम लागत में ज्यादा मुनाफे का विकल्प बनी औषधीय खेती
औषधीय और सुगंधित पौधों की खेती (Medicinal Farming) में तुलसी, अश्वगंधा, लेमन ग्रास, ब्राह्मी, खस और सतावर जैसी फसलों को शामिल किया गया है। इन फसलों की खासियत यह है कि इनमें पारंपरिक खेती की तुलना में कम पानी और कम खर्च लगता है, जबकि बाजार में इनकी मांग लगातार बनी हुई है।
छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड द्वारा किसानों को इस दिशा में प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर तैयार करना है।
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कर्ज की चिंता से मुक्त होकर खेती करेंगे किसान
योजना के तहत किसानों को खेती शुरू करने से पहले ही अग्रिम वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। बोर्ड से अनुबंधित संस्थाओं द्वारा किसानों को खेती की शुरुआती जरूरतों जैसे बोर खनन, सिंचाई पंप, पाइप लाइन, जुताई, रोपाई और निंदाई के लिए आर्थिक मदद दी जा रही है।
फसल तैयार होने के बाद किसानों को बाजार की चिंता भी नहीं करनी होगी। अनुबंधित संस्थाएं खेत से ही पूरी उपज खरीदने की गारंटी दे रही हैं, जिससे किसानों को उचित मूल्य मिलने की संभावना बढ़ गई है।
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तीन मॉडल से बढ़ाई जा रही खेती Medicinal Farming
औषधीय पौधों की खेती (Medicinal Farming) को बढ़ावा देने के लिए तीन मॉडल अपनाए जा रहे हैं। क्लस्टर मॉडल के तहत एक क्षेत्र के कई किसानों को जोड़कर बड़े स्तर पर खेती कराई जाती है। इससे उत्पादन और खरीदी दोनों आसान हो जाते हैं।
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व्यक्तिगत किसान मॉडल में किसानों को ब्राह्मी, खस और सतावर जैसी फसलों के लिए प्रेरित किया जा रहा है। वहीं महिला स्व-सहायता समूह मॉडल के माध्यम से पंचायतों और अनुपयोगी भूमि पर महिला समूहों द्वारा औषधीय पौधों की खेती कराई जा रही है।
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धमतरी और नारायणपुर के किसानों को मिलेगी राशि
दुगली में आयोजित कार्यक्रम में नारायणपुर और धमतरी जिले के किसानों को कुल 54 लाख 36 हजार रुपये की अग्रिम प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसमें धमतरी के महिला स्व-सहायता समूहों को खस, सतावर और ब्राह्मी की खेती के लिए बड़ी राशि प्रदान की जाएगी।
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धमतरी में महानदी के तट पर खस की खेती को इस योजना की सफल मिसाल माना जा रहा है। यहां किसानों और महिला समूहों ने औषधीय खेती को अपनाकर आय के नए साधन विकसित किए हैं।
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किसानों को मिल रही अतिरिक्त सुविधाएं
बोर्ड की ओर से किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधे और बीज निशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अलावा तकनीकी प्रशिक्षण, अध्ययन भ्रमण और खेती संबंधी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है।
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औषधीय खेती (Medicinal Farming) को लेकर सरकार का मानना है कि इससे वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। साथ ही स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।
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