सीजी भास्कर, 07 अगस्त। बस्तर जिले के कुमली पंचायत में वन भूमि पर की गई कार्रवाई के बाद माहौल गरमा (Forest Land) गया है। खेतों में तैयार खड़ी मक्के की फसल पर ट्रैक्टर चलाए जाने के बाद किसानों में नाराजगी बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया गया, जबकि वन विभाग का दावा है कि यह कार्रवाई अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए की गई है।
घटना के बाद क्षेत्र में वन विभाग और किसानों के बीच विवाद की स्थिति बन गई है। एक ओर विभाग कार्रवाई को नियमों के अनुरूप बता रहा है, वहीं किसान इसे अन्यायपूर्ण बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

15 एकड़ वन भूमि से हटाया गया अतिक्रमण Forest Land
वन विभाग के अनुसार बस्तर ब्लॉक के कुमली पंचायत में करीब 6 हेक्टेयर यानी लगभग 15 एकड़ वन भूमि पर अवैध कब्जे की सूचना मिली थी। जांच के बाद विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कार्रवाई करते हुए खड़ी मक्के की फसल को ट्रैक्टर से हटवा दिया।
चार लोगों पर कार्रवाई का दावा
वन विभाग का कहना है कि चार लोगों ने वन भूमि पर कब्जा कर मक्के की खेती की थी। इसी आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है। विभाग ने बताया कि संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
किसानों ने उठाए सवाल Forest Land
दूसरी ओर किसानों का कहना है कि इस क्षेत्र में करीब 100 किसान वर्षों से खेती करते आ रहे हैं। किसान हेमलाल पांडे का दावा है कि पंचायत बैठक में खड़ी फसल को काटने के लिए तीन महीने का समय देने का प्रस्ताव भी पारित किया गया था। इसके बावजूद खेतों में ट्रैक्टर चलाकर फसल नष्ट कर दी गई।
निष्पक्ष जांच की मांग
किसानों का कहना है कि यदि जमीन पर अतिक्रमण का मामला है तो कार्रवाई पुराने रिकॉर्ड और भूमि की वास्तविक स्थिति की जांच के आधार पर सभी मामलों में समान रूप से होनी (Forest Land) चाहिए। वहीं वन विभाग का कहना है कि फिलहाल प्राप्त सूचना के आधार पर चार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और पूरे मामले की जांच वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जा रही है।



