अम्बिकापुर, 13 अगस्त : सरगुजा जिले के जनपद पंचायत मैनपाट की ग्राम पंचायत नर्मदापुर में निर्माण कार्यों और विभिन्न शासकीय योजनाओं की राशि में गंभीर वित्तीय अनियमितता (Narmadapur Financial Irregularity) का मामला सामने आया है। जांच में करीब 2 करोड़ 7 लाख रुपये की राशि के आहरण में गड़बड़ी पाई गई है। मामले में संबंधित सरपंचों, सचिवों और वेंडरों को अंतिम नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
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कलेक्टर के निर्देश पर हुई जांच
ग्राम पंचायत नर्मदापुर के सचिव सिद्धार्थ प्रजापति के खिलाफ विभिन्न माध्यमों से मिली शिकायतों के बाद कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर जांच कराई गई। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विनय कुमार अग्रवाल ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व सीतापुर की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच दल गठित किया था।
जांच में मूलभूत योजनाओं, 15वें वित्त योजना, स्वच्छ भारत मिशन और अन्य निर्माण कार्यों से जुड़ी राशि के उपयोग की पड़ताल की गई। आरोप था कि वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच बिना ग्राम सभा की अनुमति और बिना कार्य कराए राशि का आहरण किया गया।
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2.07 करोड़ रुपये के आहरण में मिली गंभीर गड़बड़ी
जांच के दौरान ग्राम पंचायत के अभिलेखों की पड़ताल में कुल 2,07,16,041.01 रुपये के आहरण में गंभीर वित्तीय अनियमितता (Narmadapur Financial Irregularity) सामने आई। जांच दल के अनुसार कई मामलों में पर्याप्त प्रमाणक, मूल्यांकन, सत्यापन और नस्ती फाइल उपलब्ध नहीं थी। इसके बावजूद शासकीय राशि का आहरण किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि कई मदों में राशि खर्च किए जाने का रिकॉर्ड तो है, लेकिन संबंधित निर्माण कार्य मौके पर कराए ही नहीं गए।
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सचिवों और सरपंचों के साथ वेंडरों को भी भुगतान
जांच रिपोर्ट के अनुसार सचिव सिकंदर प्रजापति के कार्यकाल में करीब 60.64 लाख रुपये, सचिव चंद्रपाल सिंह के कार्यकाल में 8.13 लाख रुपये और सचिव अनिल यादव के कार्यकाल में 5.11 लाख रुपये की राशि के संबंध में अनियमितता पाई गई।
इसी तरह सरपंच गणेश नाग के कार्यकाल में 5.11 लाख रुपये, सरपंच राजनाथ भैंसा के कार्यकाल में 60.66 लाख रुपये और सरपंच ललिता भैंसा के कार्यकाल में 7.89 लाख रुपये की राशि से संबंधित गड़बड़ी सामने आई है। विभिन्न वेंडरों और फर्मों को भी करीब 40.78 लाख रुपये का भुगतान किया गया, जबकि संबंधित निर्माण कार्य नहीं कराए जाने की बात जांच में सामने आई है।
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संतोषजनक नहीं हुआ तो होगी कार्रवाई
जांच के बाद संबंधितों को अंतिम नोटिस जारी किया गया है। सभी से तीन दिवस के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा गया है। अधिकारियों के मुताबिक स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए जाने पर छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम 1993 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
इसके तहत शासकीय राशि की वसूली के साथ संबंधित सरपंचों और सचिवों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधितों के जवाब और जांच रिपोर्ट के आधार पर तय होगी।
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