सीजी भास्कर, 14 अगस्त। जगदलपुर, बस्तर में शिक्षा व्यवस्था को लेकर किए जा रहे सरकारी दावों के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो कई सवाल खड़े करती है। यहां बच्चे नियमित रूप से स्कूल तो पहुंच रहे हैं, लेकिन उनके पास पढ़ाई के लिए अपना स्कूल भवन नहीं है। तीन साल पहले जर्जर स्कूल भवन को तोड़ दिया गया था। उस समय उम्मीद थी कि जल्द ही नया भवन तैयार हो जाएगा, लेकिन तीन साल बीतने के बाद भी नया भवन नहीं बन सका है। मामला तोकापाल विकासखंड के ग्राम एर्राकोट का है। (Bastar School Building Crisis)
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पंचायत भवन में लग रही बच्चों की कक्षाएं : Bastar School Building Crisis
फिलहाल एर्राकोट में बच्चों की कक्षाएं पंचायत भवन में संचालित हो रही हैं। इसी भवन का इस्तेमाल राशन वितरण, पंचायत के कामकाज और पोस्ट ऑफिस के लिए भी किया जाता है। यानी एक ही भवन में बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ कई सरकारी गतिविधियां भी संचालित हो रही हैं।
दरअसल, पुराने स्कूल भवन को सुरक्षा के लिहाज से तोड़ने के बाद दो अतिरिक्त कमरों और एक सीएससी भवन में बच्चों की पढ़ाई शुरू कराई गई थी। लेकिन एक अतिरिक्त कक्ष की हालत खराब होने और उसकी छत का प्लास्टर गिरने के बाद बच्चों को पंचायत भवन में शिफ्ट करना पड़ा।
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आखिर कब तक चलेगी अस्थायी व्यवस्था?
शिक्षकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए फिलहाल पंचायत भवन में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। हालांकि, सवाल यह है कि यह अस्थायी व्यवस्था आखिर कब तक जारी रहेगी?
स्कूल भवन (Bastar School Building Crisis) टूटने के बाद बच्चों और शिक्षकों को उम्मीद थी कि नया भवन जल्द तैयार हो जाएगा। लेकिन तीन साल बीतने के बावजूद निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हुआ है। ऐसे में एर्राकोट के बच्चों के सामने पढ़ाई की परेशानी के साथ-साथ अपने स्कूल भवन के भविष्य को लेकर भी सवाल खड़ा हो गया है।
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