सीजी भास्कर, 16 अगस्त : बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में शहीद हुए जवानों की वीरगाथाओं को अब डिजिटल रूप से सहेजा जाएगा। दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा समेत नक्सल प्रभावित इलाकों में शहीद जवानों की तस्वीरों के साथ QR कोड (QR Code) लगाए जा रहे हैं। मोबाइल से कोड स्कैन करते ही संबंधित जवान का नाम, तस्वीर, ड्यूटी और शहादत से जुड़ी जानकारी सामने आ सकेगी।
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इस पहल का उद्देश्य शहीद जवानों के बलिदान को केवल आंकड़ों तक सीमित रखने के बजाय उनकी व्यक्तिगत कहानियों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है। शहीद स्मारकों और तस्वीरों के साथ तैयार की जा रही डिजिटल जानकारी के जरिए लोग जवानों की सेवा और शहादत के बारे में आसानी से जान सकेंगे।
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2000 से 2026 तक करीब 1280 जवानों ने दी शहादत
बस्तर संभाग में वर्ष 2000 से 2026 तक करीब 1280 जवानों ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में अपनी जान गंवाई। दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा लंबे समय तक नक्सल प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में रहे हैं। ताड़मेटला, रानी बोदली, मिपना और बुरकापाल जैसे इलाकों में हुए बड़े नक्सली हमलों में भी बड़ी संख्या में जवान शहीद हुए।
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अब इन्हीं शहीद स्थलों को तिरंगा यात्रा से भी जोड़ा जा रहा है। यात्रा के दौरान जवानों की शहादत वाले स्थानों पर पहुंचकर श्रद्धांजलि दी जा रही है। इन स्थानों की मिट्टी को भी सम्मान के साथ संग्रहित किया जा रहा है, ताकि शहीदों से जुड़ी यादों को सुरक्षित रखा जा सके।
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QR कोड स्कैन करते ही मिलेगी जानकारी
शहीद स्मारकों पर लगाए जा रहे QR कोड (QR Code) के जरिए लोग अपने मोबाइल से कुछ ही सेकंड में संबंधित जवान की जानकारी हासिल कर सकेंगे। डिजिटल प्रोफाइल में जवान की तस्वीर, सेवा, ड्यूटी और शहादत से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने की योजना है।
इससे शहीद जवानों की व्यक्तिगत कहानियां लोगों तक पहुंचेंगी। साथ ही उन स्थानों की अहमियत भी सामने आएगी, जहां जवानों ने देश की सुरक्षा और बस्तर में शांति के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
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आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचेगी शहादत की कहानी
डिजिटल प्रोफाइल तैयार होने के बाद शहीद स्मारक पर पहुंचने वाला कोई भी व्यक्ति संबंधित जवान की तस्वीर के साथ QR कोड (QR Code) स्कैन कर उसकी पूरी जानकारी हासिल कर सकेगा। इससे युवाओं को बस्तर में नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई और जवानों के योगदान को समझने का अवसर मिलेगा।
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इस पहल के तहत शहीद स्थलों की ऐतिहासिक और भावनात्मक अहमियत को भी सुरक्षित रखने का प्रयास किया जा रहा है। उद्देश्य है कि आने वाली पीढ़ियां उन जवानों के बलिदान को जानें, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी।




