सीजी भास्कर, 20 अगस्त : रक्षाबंधन के त्योहार पर बाजार में अलग-अलग तरह की राखियां देखने को मिल रही हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ में धान-चावल और स्थानीय संसाधनों से तैयार राखियां लोगों का ध्यान खींच रही हैं। महिलाओं ने अपने हुनर और रचनात्मकता से इन राखियों को तैयार किया है। इन राखियों के जरिए स्थानीय संसाधनों के इस्तेमाल के साथ महिला आत्मनिर्भरता की नई मिसाल भी सामने आई है।

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स्थानीय संसाधनों से तैयार हुईं खास राखियां Rice Rakhi
कोरबा जिले के बेला कछार, दोनद्रो पंचायत का प्रसन्न स्व सहायता समूह इन राखियों को तैयार कर रहा है। समूह की महिलाओं ने धान, बर्रे भाजी, साबूदाना और चावल जैसे स्थानीय एवं प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल कर आकर्षक राखियां बनाई हैं। इन राखियों की खासियत उनकी डिजाइन के साथ-साथ स्थानीय संसाधनों का अनोखा उपयोग भी है।
2018 से बिहान से जुड़ा 22 सदस्यीय समूह
प्रसन्न स्व सहायता समूह वर्ष 2018 से बिहान से जुड़कर महिला सशक्तिकरण और आजीविका गतिविधियों को आगे बढ़ा रहा है। समूह में कुल 22 सदस्य हैं। महिलाएं मांग और मौसम के अनुसार अलग-अलग उत्पाद तैयार करती हैं। इनमें बाती, अगरबत्ती, कॉस्मेटिक सामग्री और कपड़ों से जुड़े काम शामिल हैं।
समय के साथ समूह की महिलाओं ने नए उत्पाद तैयार करने पर भी जोर दिया। इसी कड़ी में रक्षाबंधन के लिए तैयार की गई राखियों में स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल किया गया। Rice Rakhi की इन राखियों को लोगों की ओर से भी पसंद किया जा रहा है।
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कलेक्टोरेट में लगाया राखियों का स्टॉल
समूह की सदस्य नीतू कर्ष और मीरा देवांगन ने कलेक्टोरेट परिसर में राखियों का स्टॉल लगाया। यहां उन्होंने अपने हाथों से तैयार की गई अलग-अलग डिजाइन की राखियां प्रदर्शित कीं। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने भी स्टॉल पर पहुंचकर राखियां खरीदीं और महिलाओं के हुनर की सराहना की।
कलेक्टर के प्रोत्साहन से समूह की महिलाओं का उत्साह बढ़ा है। उनका कहना है कि इससे उन्हें अपने उत्पादों को और बेहतर बनाने तथा नई गतिविधियों से जुड़ने का आत्मविश्वास मिला है।
महतारी वंदन योजना से मिला आर्थिक संबल
प्रसन्न स्व सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि महतारी वंदन योजना से भी उन्हें आर्थिक सहायता मिल रही है। योजना के तहत मिलने वाली राशि का उपयोग वे घरेलू जरूरतों के साथ अपने काम और आजीविका गतिविधियों में कर रही हैं। महिलाओं के मुताबिक उन्हें अब तक योजना की 30 किश्तें मिल चुकी हैं।
यह आर्थिक सहायता उनके लिए केवल जरूरतें पूरी करने का माध्यम नहीं है, बल्कि अपने छोटे-बड़े काम आगे बढ़ाने में भी मददगार साबित हो रही है। इससे महिलाओं के आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी हुई है।
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मुख्यमंत्री के लिए तैयार की विशेष राखी
रक्षाबंधन के मौके पर समूह की महिलाओं ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के लिए भी विशेष राखी तैयार की है। महिलाओं ने महतारी वंदन योजना के जरिए मिल रहे आर्थिक सहयोग के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया है। उन्होंने कहा कि योजना से उन्हें लगातार आर्थिक संबल मिल रहा है।
हुनर और मेहनत से आत्मनिर्भरता की राह
प्रसन्न स्व सहायता समूह की कहानी बताती है कि स्थानीय संसाधनों और महिलाओं के हुनर को सही अवसर मिले तो उसे आजीविका का मजबूत माध्यम बनाया जा सकता है। धान-चावल से तैयार Rice Rakhi से लेकर अन्य उत्पादों तक समूह की महिलाएं स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
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