सीजी भास्कर, 04 अक्टूबर । साइबर ठगी और ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में फ्रीज किए गए बैंक खातों को खुलवाने के लिए खाताधारकों को बार-बार थाने और साइबर सेल के चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सकती है। (Fraud Frozen Bank Account)
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की मानक प्रक्रिया के तहत शिकायत दर्ज होने के बाद यदि 90 दिनों के भीतर खाते पर रोक जारी रखने या हटाने का वैध निर्देश नहीं मिलता है, तो बैंक निर्धारित प्रक्रिया के तहत रोक हटाने की कार्रवाई शुरू कर सकता है। हालांकि, अदालत का कोई आदेश लंबित होने पर खाते पर रोक जारी रह सकती है।
यह भी पढ़ें : डिजिटल मार्केटिंग जॉब के नाम पर ऑनलाइन ठगी: पहले दिया छोटे पैसे का लालच, फिर ठग लिए डेढ़ लाख से ज्यादा..
छोटे कारोबारियों के खाते भी हो जाते हैं फ्रीज : Fraud Frozen Bank Account
साइबर ठगी की शिकायत मिलने के बाद पुलिस लेनदेन की कड़ी की जांच करती है। इसके बाद संदिग्ध लेनदेन से जुड़े खातों पर बैंक के माध्यम से रोक लगाई जाती है। कई मामलों में ऐसे खाताधारक भी इसकी चपेट में आ जाते हैं, जिनका ठगी से सीधा संबंध नहीं होता।
उदाहरण के तौर पर किसी छोटे दुकानदार के खाते में ग्राहक ने 10 या 20 रुपए का सामान्य यूपीआई भुगतान किया और बाद में उसी भुगतानकर्ता के खाते में संदिग्ध लेनदेन सामने आया, तो लेनदेन की कड़ी में दुकानदार का खाता भी ब्लॉक हो सकता है। जांच के दौरान लेयर-1 से लेकर लेयर-6 तक के खातों पर रोक लगाई जा सकती है। इससे कारोबार, वेतन और रोजमर्रा के खर्च प्रभावित होते हैं।
यह भी पढ़ें : Mule account racket busted : साइबर फ्रॉड पर बड़ा एक्शन: म्यूल अकाउंट रैकेट का खुलासा, 5 गिरफ्तार

90 दिन की अवधि में तय होगी खाते की स्थिति
संबंधित खाताधारक बैंक में लिखित शिकायत देकर खाते पर रोक लगाए जाने का आधार और उसे हटाने की प्रक्रिया की जानकारी मांग सकता है। बैंक शिकायत को निर्धारित व्यवस्था में दर्ज (Fraud Frozen Bank Account) करेगा। इसके बाद यदि 90 दिनों के भीतर जांच एजेंसी की ओर से रोक जारी रखने या हटाने का वैध निर्देश नहीं मिलता है, तो बैंक निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार खाते को अनफ्रीज करने की कार्रवाई कर सकता है।
90 दिन की अवधि पूरी होने से कम से कम 15 दिन पहले संबंधित जांच एजेंसी को इसकी सूचना देने का भी प्रावधान है। वहीं, यदि विवाद केवल किसी खास रकम से जुड़ा है, तो संबंधित रकम पर रोक रखते हुए बाकी राशि के इस्तेमाल की अनुमति देने का सिद्धांत भी लागू हो सकता है।
फ्रीज खातों से जुड़ी शिकायतों के उदाहरण
गोलबाजार के एक कारोबारी के खाते में ग्राहक ने सामान खरीदने के बाद यूपीआई से 90 रुपए का भुगतान किया था। इसके 24 घंटे के भीतर खाता ब्लॉक हो गया। कारोबारी का पूरा काम इसी खाते से चलता था और करीब तीन महीने की प्रक्रिया के बाद खाता खुल पाया।
दूसरे मामले (Fraud Frozen Bank Account) में खमतराई के एक व्यक्ति के खाते से एपीके फाइल के जरिए 76 हजार रुपए निकाल लिए गए थे। इसके बाद उन्होंने अपना वेतन खाता ब्लॉक कराया, लेकिन कई महीने बाद भी खाता नहीं खुला, जिससे उनका वेतन अटक गया।
साइबर क्राइम प्रभारी के अनुसार, एमआरएम और जीएमआर पोर्टल के जरिए पीड़ितों की रकम वापस करने की प्रक्रिया चल रही है। जिन खातों के संबंध में अदालत का कोई निर्देश नहीं है, उन्हें अनफ्रीज करने की प्रक्रिया भी इसी माध्यम से की जा रही है।
यह भी पढ़ें :Cyber Awareness Campaign: छात्राओं ने दिखाई प्रतिभा, साइबर फ्रॉड से बचाव की मिली जानकारी
ख़बरें और भी हैं : म्यूल बैंक खाता गिरोह के सरगना समेत 8 आरोपी गिरफ्तार:बलरामपुर में बैंक खातों की करते थे खरीद-बिक्री, ऑनलाइन सट्टा का भी संचालन


