सीजी भास्कर, 29 अगस्त : छत्तीसगढ़ में किसान अब पारंपरिक धान की खेती (Medicinal Rice) के साथ ऐसी खास किस्मों की ओर बढ़ रहे हैं, जिनकी मांग फूड इंडस्ट्री के साथ हेल्थ और न्यूट्रास्युटिकल सेक्टर में भी है। औषधीय गुणों वाली इन धान की किस्मों पर वैज्ञानिक शोध के साथ किसानों को बाजार से जोड़ने की तैयारी की जा रही है, जिससे उन्हें सामान्य धान की तुलना में बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है।
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23 हजार से ज्यादा धान की किस्में सुरक्षित
इस पहल का बड़ा केंद्र रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय है। विश्वविद्यालय के जर्मप्लाज्म बैंक में करीब 23,250 पारंपरिक और दुर्लभ धान की किस्मों को सुरक्षित रखा गया है। इन किस्मों में छत्तीसगढ़ के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों की पारंपरिक प्रजातियां भी शामिल हैं।
यह संग्रह वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण है। बदलते मौसम के अनुसार नई किस्में विकसित करने के साथ अधिक पोषण वाली फसलों पर शोध में भी इनका इस्तेमाल किया जा सकता है।
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लाइचा, महाराजी और गठुवन पर रिसर्च
छत्तीसगढ़ की पारंपरिक धान किस्मों में लाइचा, महाराजी और गठुवन को खास माना जा रहा है। कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल के मुताबिक इन किस्मों के औषधीय गुणों को लेकर वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है।
शोध के अनुसार सामान्य चावल की तुलना में लाइचा में 231 अधिक फाइटोकेमिकल्स पाए गए हैं। वहीं महाराजी धान में मौजूद तत्वों को लेकर स्तन और फेफड़ों के कैंसर से जुड़ी कोशिकाओं पर संभावित प्रभाव का अध्ययन किया जा रहा है। गठुवन किस्म का पारंपरिक रूप से गठिया के उपचार में इस्तेमाल किए जाने का उल्लेख मिलता है और इसके संभावित औषधीय व कैंसररोधी गुणों पर भी शोध जारी है।
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धान की खेती से किसानों की बढ़ सकती है कमाई
औषधीय धान (Medicinal Rice) की खासियत केवल स्वास्थ्य से जुड़े शोध तक सीमित नहीं है। इन किस्मों को फार्मास्युटिकल, हेल्थ-फूड और न्यूट्रास्युटिकल उद्योग से जोड़ने पर किसानों के लिए नए बाजार खुल सकते हैं।
कृषि विश्वविद्यालय का जोर ऐसी फसलों को बढ़ावा देने पर है, जिनकी बाजार में विशेष मांग हो। यदि किसानों को सीधे दवा और हेल्थ-फूड कंपनियों से जोड़ा जाता है तो उन्हें अपनी उपज का बेहतर और प्रीमियम मूल्य मिल सकता है।
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पुरानी धान किस्मों को मिल रहा आधुनिक बाजार
छत्तीसगढ़ में पारंपरिक धान की खेती लंबे समय से होती रही है। अब वैज्ञानिक शोध, आधुनिक कृषि तकनीक और बेहतर मार्केट लिंकेज के जरिए इन किस्मों को नई पहचान देने की कोशिश की जा रही है।
जैव विविधता के संरक्षण के साथ किसानों की आय बढ़ाना भी इस पहल का अहम उद्देश्य है। औषधीय धान (Medicinal Rice) की मांग बढ़ने पर पारंपरिक किस्मों की खेती किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का जरिया बन सकती है।
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