सीजी भास्कर, 03 सितंबर : करीब तीन साल से अधूरा पड़ा पुल अब ग्रामीणों और स्कूली बच्चों के लिए परेशानी का बड़ा कारण बन गया है। रास्ता (Gariaband Bridge Issue) पूरा नहीं होने से बच्चों को रोजाना जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है। करीब 30 से ज्यादा बच्चे इसी खतरनाक रास्ते से स्कूल पहुंच रहे हैं।

यह भी पढ़ें…Women Empowerment India : रूप कुमारी चौधरी बोलीं- महिलाओं को मिल रहा आगे बढ़ने का अवसर
20 फीट की सीढ़ी से अधूरे पुल तक पहुंचते हैं बच्चे
मामला गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक के ग्राम खामभाठा का है। यहां पैरी नदी पर करीब 90 मीटर लंबे पुल का निर्माण तीन साल बाद भी पूरा नहीं हुआ है। बच्चों को अधूरे पुल तक पहुंचने के लिए करीब 20 फीट की सीढ़ी का सहारा लेना पड़ता है।
इसके बाद बच्चे पिलर पर बिछाई गई सेंटरिंग प्लेट और प्लाई के सहारे नदी पार करते हैं। यह सफर (Gariaband Bridge Issue) बेहद जोखिम भरा है। पुल के दोनों तरफ गहरी खाई है। जगह-जगह सरिए भी बाहर निकले हुए हैं।
यह भी पढ़ें…Chhattisgarh BJP Cell Appointments : छत्तीसगढ़ भाजपा में संगठन विस्तार, 15 प्रकोष्ठों के प्रभारियों की घोषणा
बारिश में बढ़ जाता है खतरा
बारिश के दौरान पैरी नदी का जलस्तर और बहाव बढ़ जाता है। ऐसे में अधूरे पुल से गुजरना और भी खतरनाक हो जाता है। छोटे बच्चों को उनके माता-पिता खुद नदी और पुल पार कराने के लिए साथ लेकर पहुंचते हैं।
मिडिल स्कूल के प्रिंसिपल चित्रसेन पटेल के मुताबिक, छुट्टी के समय स्कूल प्रबंधन की ओर से सहयोगियों की एक टोली बच्चों को सुरक्षित तरीके से पुल पार कराने के लिए तैनात रहती है।
यह भी पढ़ें…Truck Dispute Murder Case : जांजगीर में एक्सीडेंट नहीं, दोस्त की हत्या थी; ट्रक विवाद में पीटकर मारा
ग्रामीणों की आवाजाही भी प्रभावित
ग्रामीण नक्छेना राम और हितराम सांडे ने बताया कि खामभाठा सहित आसपास के गांवों के लोग पंचायत और ब्लॉक मुख्यालय आने-जाने के लिए इसी रास्ते पर निर्भर हैं। पुल अधूरा होने के कारण दुपहिया और चार पहिया वाहन रखने वाले ग्रामीणों को अपने वाहन पंचायत मुख्यालय देहारगुड़ा में छोड़ना पड़ता है।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और दूसरे कर्मचारियों को भी रोजाना इसी समस्या का सामना करना पड़ता है। पुल की स्थिति (Gariaband Bridge Issue) के कारण सामान्य आवाजाही तक प्रभावित हो रही है।
यह भी पढ़ें…Railway Train Timing Change : रेलवे ने बदला 6 ट्रेनों का समय, मालतीपाटपुर से होंगी रवाना
5.66 करोड़ की लागत से होना था निर्माण
पंचायत मुख्यालय देहारगुड़ा और खामभाठा के बीच पैरी नदी पर 90 मीटर लंबे पुल के निर्माण के लिए वर्ष 2021 में 5 करोड़ 66 लाख रुपए की मंजूरी दी गई थी। वर्ष 2023 में इसे तकनीकी स्वीकृति मिली।
निर्माण कार्य वर्ष 2025 तक पूरा किया जाना था। लेकिन तय समय बीतने के बाद भी पुल अधूरा है। बताया जा रहा है कि निर्माण कंपनी को करीब 70 फीसदी राशि का भुगतान भी किया जा चुका है।
यह भी पढ़ें…Common Krait Snake Bite : सोते वक्त करैत सांप ने 13 साल के बच्चे को डसा, कान और हाथ पर काटने से मौत
PWD ने बताया 70 फीसदी काम पूरा
PWD के इंजीनियर के अनुसार पुल का करीब 70 फीसदी काम पूरा हो चुका है। फिलहाल एप्रोच का काम बाकी है। बारिश खत्म होने के बाद बाकी निर्माण कार्य जल्द पूरा कराने की बात कही गई है।
वहीं बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए शिक्षा विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि बारिश के दौरान बच्चों को नदी पार कर स्कूल न भेजें। उन्हें परिचित लोगों के घर देहारगुड़ा में रखने की सलाह दी गई है।
यह भी पढ़ें…Kamlesh Rajput ED Raid : पूर्व पटवारी के परिवार में 4 सरकारी अधिकारी, संपत्तियों और आय की जांच पर नजर
ग्रामीणों ने जल्द निर्माण पूरा करने की मांग की
ग्रामीणों का कहना है कि पुल निर्माण (Gariaband Bridge Issue) जल्द पूरा होना जरूरी है। इससे बच्चों को जोखिम उठाकर नदी पार नहीं करनी पड़ेगी। साथ ही आसपास के गांवों के लोगों की आवाजाही भी आसान होगी। अब ग्रामीण अधूरे निर्माण को जल्द पूरा कराने की मांग कर रहे हैं, ताकि बारिश के मौसम में किसी बड़े हादसे का इंतजार न करना पड़े।
खबरें और भी हैं : Durg Opium Cultivation Case : दुर्ग अफीम खेती मामले में पूर्व भाजपा नेता विनायक ताम्रकार को हाईकोर्ट से जमानत, FIR रद्द करने की मांग खारिज




