सीजी भास्कर, 04 सितंबर : छह साल से अधूरे पड़े एक पुल ने स्कूली बच्चों की मुश्किल बढ़ा (Bridge Construction) दी है। बारिश में नदी का जलस्तर बढ़ते ही बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए ऐसा रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिसे देखकर ही खतरे का अंदाजा लगाया जा सकता है। मामले को लेकर अब मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग उठी है।

जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे बच्चे
यह मामला गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड में देहारगुड़ा और खामभाठा के बीच पैरी नदी पर बन रहे पुल का है। करीब 300 मीटर लंबा पुल लगभग छह वर्षों से अधूरा पड़ा है। बारिश के दौरान नदी में पानी बढ़ने पर बच्चे अधूरे पुल के पिलर से लगी करीब 20 फीट ऊंची लोहे की सीढ़ी के सहारे आवाजाही कर रहे हैं।
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अधूरे पुल की स्थिति (Bridge Construction) के बीच बच्चों की यह आवाजाही बेहद खतरनाक बताई जा रही है। पुल से निकले लोहे के सरिए, ऊंची और फिसलन भरी सीढ़ी और नीचे बहती तेज नदी हादसे का बड़ा खतरा पैदा कर रहे हैं। ऐसे में किसी भी समय गंभीर दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
इदरीस गांधी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
बच्चों की सुरक्षा को लेकर छत्तीसगढ़ उर्दू अकादमी के अध्यक्ष इदरीस गांधी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखा है। उन्होंने पुल निर्माण कार्य में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। साथ ही निर्माण पूरा होने तक बच्चों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की मांग रखी है।
पुल जल्द पूरा कराने की मांग
इदरीस गांधी ने कहा है कि पुल निर्माण (Bridge Construction) को समयबद्ध तरीके से पूरा कराया जाना जरूरी है। इससे बच्चों को स्कूल जाने के लिए जान जोखिम में डालने की मजबूरी खत्म होगी। सुरक्षित रास्ता मिलने से ग्रामीणों की आवाजाही भी आसान होगी।
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सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरें
इस मामले के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद अधूरे पुल की समस्या चर्चा में आ गई है। मामला अब केवल सड़क और पुल निर्माण तक सीमित नहीं है। बच्चों की सुरक्षा भी इससे सीधे जुड़ी है।
अधूरा पुल (Bridge Construction) लंबे समय से क्षेत्र के लोगों के लिए परेशानी बना हुआ है। बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है। अब स्थानीय स्तर पर कार्रवाई के साथ पुल निर्माण जल्द पूरा कराने की मांग तेज हो गई है।




