सीजी भास्कर, 09 सितंबर : कम पानी, कम खरपतवार और बेहतर उत्पादन के लिए किसान अब आधुनिक तकनीकों का सहारा ले रहे हैं। सक्ती जिले में मल्चिंग तकनीक से खीरे की खेती (Mulching Farming Sakti) करने वाले किसान गोपाल कृष्ण पटेल ने उत्पादन बढ़ाकर 3.25 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है। आधुनिक तकनीक अपनाने के बाद उनकी सब्जी की खेती से होने वाली आय में 2 से 3 गुना तक वृद्धि हुई है।

पारंपरिक खेती में बढ़ी परेशानी Mulching Farming Sakti
सक्ती जिले के विकासखंड डभरा अंतर्गत ग्राम जवाली निवासी कृषक गोपाल कृष्ण पटेल के पास एक हेक्टेयर भूमि है। पहले वे पारंपरिक तरीके से सब्जियों की खेती करते थे। इस दौरान सिंचाई में अधिक पानी की जरूरत, खरपतवार की समस्या, मिट्टी में नमी की कमी और बढ़ती लागत के कारण उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा था।
उद्यानिकी विभाग के तकनीकी अमले ने उन्हें प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक के फायदे बताए। साथ ही एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के तहत उपलब्ध मल्चिंग अनुदान की जानकारी भी दी गई। विभागीय मार्गदर्शन मिलने के बाद किसान ने आधुनिक फसल प्रबंधन के साथ खीरे की खेती शुरू की।
उत्पादन 250 क्विंटल तक पहुंचा
खीरे की खेती में मल्चिंग तकनीक (Mulching Farming Sakti) अपनाने से पहले गोपाल कृष्ण पटेल को एक हेक्टेयर में करीब 120 से 150 क्विंटल तक उत्पादन मिलता था। तकनीक अपनाने के बाद उत्पादन बढ़कर 200 से 250 क्विंटल तक पहुंच गया। इससे उन्हें करीब 5 लाख रुपये की बिक्री प्राप्त हुई।
उत्पादन पर लगभग 1.75 लाख रुपये की लागत आने के बाद किसान को 3.25 लाख रुपये का शुद्ध लाभ मिला। उत्पादन में इस बढ़ोतरी ने यह दिखाया कि उचित तकनीक और बेहतर फसल प्रबंधन से सब्जी उत्पादन में लागत और आमदनी के बीच बेहतर संतुलन बनाया जा सकता है।
कम लागत में बढ़ी कमाई
किसान गोपाल कृष्ण पटेल के मुताबिक मल्चिंग तकनीक (Mulching Farming Sakti) अपनाने और उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन से उन्हें फसल का बेहतर उत्पादन लेने में सफलता मिली। उनका कहना है कि पारंपरिक खेती की तुलना में आधुनिक तकनीक से सब्जी उत्पादन करने पर उनकी आय में 2 से 3 गुना तक वृद्धि हुई है।
मल्चिंग से खेत में नमी बनाए रखने, खरपतवार को नियंत्रित करने और सिंचाई की जरूरत को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद मिली। इसके चलते किसान को उत्पादन बढ़ाने के साथ खेती को अधिक लाभकारी बनाने का अवसर मिला।
दूसरे किसानों को भी प्रेरणा
गोपाल कृष्ण पटेल की सफलता के बाद क्षेत्र के दूसरे किसान भी आधुनिक खेती की तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं। उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और योजनाओं के माध्यम से किसान सब्जियों की खेती में नई तकनीकों का इस्तेमाल कर बेहतर उत्पादन और आय हासिल कर सकते हैं।
मल्चिंग आधारित खेती (Mulching Farming Sakti) का यह उदाहरण किसानों के लिए तकनीक आधारित कृषि, बेहतर उत्पादन और अधिक आमदनी की संभावनाओं को दिखाता है। खासकर सब्जी उत्पादक किसान उचित फसल प्रबंधन और उपलब्ध सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर खेती को अधिक लाभकारी बना सकते हैं।
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