सीजी भास्कर, 11 सितंबर : साल 2026 के आखिरी तीन महीने समुद्र और तटीय इलाकों के लिए बेहद अहम हो सकते हैं। अक्टूबर से दिसंबर के बीच नॉर्थ इंडियन ओशन में 3 ट्रॉपिकल साइक्लोन बनने का अनुमान है। इस चक्रवाती गतिविधि (Cyclone Forecast 2026) की सबसे बड़ी चिंता इसकी संभावित ताकत है, क्योंकि अनुमानित पावर डिसिपेशन इंडेक्स (PDI) पिछले 44 साल के औसत से करीब 83 प्रतिशत ज्यादा रह सकता है।
इसरो के अनुमान के मुताबिक 2026 के पोस्ट मानसून सीजन में बनने वाले संभावित तीन तूफानों का कुल PDI करीब 13.06 × 10⁶ नॉट्स³ रह सकता है। इसका मतलब है कि अक्टूबर से दिसंबर के दौरान नॉर्थ इंडियन ओशन में सामान्य से ज्यादा मजबूत साइक्लोन एक्टिविटी देखने को मिल सकती है। हालांकि, यह किसी एक तूफान की तारीख, रास्ते या लैंडफॉल की सटीक जानकारी नहीं देता।
3 साइक्लोन का अनुमान
पोस्ट मानसून सीजन की गतिविधि (Cyclone Forecast 2026) को लेकर किए गए अनुमान में अक्टूबर से दिसंबर के बीच नॉर्थ इंडियन ओशन में तीन चक्रवाती तूफान बनने की संभावना जताई गई है। PDI यानी पावर डिसिपेशन इंडेक्स का इस्तेमाल तूफान की संभावित ताकत और उसकी सक्रियता को समझने के लिए किया जाता है।
आसान भाषा में समझें तो किसी तूफान की हवा कितनी तेज है और वह कितने समय तक मजबूत बना रहता है, इन दोनों पहलुओं का असर PDI पर पड़ता है। इसलिए PDI का ज्यादा होना पूरे सीजन में चक्रवाती गतिविधि के अपेक्षाकृत मजबूत रहने का संकेत माना जा सकता है।
44 साल के आंकड़ों पर अनुमान
इस अनुमान (Cyclone Forecast 2026) को तैयार करने के लिए करीब 40 साल के मौसम और समुद्र से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन किया गया। इसमें समुद्र और वातावरण की अलग-अलग परिस्थितियों के साथ उन कारकों को देखा गया, जिनका चक्रवात बनने और उसकी ताकत पर असर पड़ सकता है।
जनवरी से अगस्त तक उपलब्ध आंकड़ों और समुद्री-वायुमंडलीय परिस्थितियों के आधार पर अक्टूबर से दिसंबर के पोस्ट मानसून सीजन की संभावित गतिविधि का आकलन किया गया है। अनुमान के मुताबिक इस बार PDI पिछले 44 साल के औसत की तुलना में काफी अधिक रह सकता है।
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तटीय इलाकों के लिए अलर्ट
नॉर्थ इंडियन ओशन से जुड़े भारत समेत कई देशों के तटीय क्षेत्र हर साल चक्रवाती तूफानों की चपेट में आते हैं। ऐसे में अगर किसी पूरे सीजन में सामान्य से ज्यादा तूफानी गतिविधि (Cyclone Forecast 2026) का अनुमान पहले ही मिल जाए, तो प्रशासन और राहत-बचाव एजेंसियां अपनी तैयारियां मजबूत कर सकती हैं।
सरकार और स्थानीय प्रशासन जरूरत के अनुसार राहत एवं बचाव टीमों को पहले से तैयार रख सकते हैं। मछुआरों को समुद्र में जाने से पहले चेतावनी देने, संवेदनशील इलाकों की निगरानी बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की योजना भी बनाई जा सकती है।
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तारीख और लैंडफॉल तय नहीं
सबसे जरूरी बात यह है कि यह अनुमान किसी एक तूफान की सटीक तारीख, उसके रास्ते या लैंडफॉल की जगह नहीं बताता। यह सिर्फ अक्टूबर से दिसंबर के दौरान पूरे नॉर्थ इंडियन ओशन क्षेत्र में संभावित चक्रवाती गतिविधि की व्यापक तस्वीर देता है।
इसलिए संभावित साइक्लोन (Cyclone Forecast 2026) को लेकर अभी किसी खास शहर या तटीय क्षेत्र में तूफान आने की बात नहीं कही जा सकती। वास्तविक तूफान बनने पर उसकी दिशा, गति और लैंडफॉल को लेकर मौसम विभाग की ताजा चेतावनियां ही महत्वपूर्ण होंगी। फिलहाल 2026 के पोस्ट मानसून सीजन में सामान्य से अधिक सक्रिय साइक्लोन गतिविधि की संभावना पर नजर रखना जरूरी है।
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