सीजी भास्कर, 15 सितंबर : प्रसिद्ध कथा वाचक अनिरुद्धाचार्य के बयान (Aniruddhacharya Statement) ने धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर चर्चा तेज कर दी है। उन्होंने कहा कि जहां ऐतिहासिक रूप से मंदिर तोड़े गए हैं, वहां मंदिरों की पुनर्स्थापना की मांग गलत नहीं है। साथ ही उन्होंने समाज में प्रेम, सद्भाव और भाईचारा बनाए रखने पर जोर देते हुए सभी के कल्याण की कामना को सनातन परंपरा की मूल भावना बताया।
अनिरुद्धाचार्य जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडीह में जयपुरिया परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल होने पहुंचे हैं। कथा के दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में धार्मिक और सामाजिक विषयों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक विषयों पर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी जानी चाहिए और किसी को अनावश्यक रूप से आहत करने से बचना चाहिए।
मंदिरों की पुनर्स्थापना पर बड़ा बयान
अनिरुद्धाचार्य ने मंदिरों के पुनर्निर्माण की मांग (Aniruddhacharya Statement) को लेकर कहा कि इतिहास में जहां मंदिरों के विध्वंस की घटनाएं हुई हैं, वहां उन मंदिरों की पुनर्स्थापना की बात करना गलत नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस विषय पर ऐतिहासिक तथ्यों को सामने रखकर शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखनी चाहिए।
उन्होंने इस दौरान किसी धर्म के प्रति घृणा या बैर रखने के विचार को उचित नहीं बताया। उनका कहना था कि धार्मिक विषयों पर चर्चा करते समय सामाजिक सौहार्द और आपसी सम्मान बना रहना जरूरी है।
‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ का संदेश
कथा वाचक ने सनातन की मूल भावना (Aniruddhacharya Statement) का उल्लेख करते हुए ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इसका भाव सभी लोगों के सुखी और निरोग रहने की कामना करना है। उन्होंने समाज में प्रेम, सद्भाव और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। धार्मिक पहचान के आधार पर किसी के प्रति घृणा या बैर रखना सनातन परंपरा की मूल भावना नहीं है।
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‘मजहब नहीं सिखाता…’ पर असहमति
अनिरुद्धाचार्य ने चर्चित पंक्ति ‘मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना’ (Aniruddhacharya Statement) को लेकर अपनी असहमति भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि इसके स्थान पर ‘सनातन नहीं सिखाता आपस में बैर रखना’ कहना अधिक उचित होगा। उनका कहना था कि समाज में भाईचारा और सद्भाव कायम रहना चाहिए। धार्मिक पहचान के आधार पर लोगों के बीच दूरी या द्वेष बढ़ाना उचित नहीं है।
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साइबर ठगी से भी किया सावधान
कथा के दौरान अनिरुद्धाचार्य ने साइबर ठगी से बचाव का संदेश (Aniruddhacharya Statement) भी दिया। उन्होंने हजारों श्रद्धालुओं से कहा कि डिजिटल दुनिया में सावधानी और विवेक बेहद जरूरी है। उन्होंने श्रद्धालुओं को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने का संकल्प भी दिलाया। उन्होंने कहा कि अनजान संदेश, संदिग्ध संपर्क और लालच देने वाले प्रस्तावों से सावधान रहना चाहिए। थोड़ी सी सतर्कता से लोग साइबर ठगी का शिकार होने से बच सकते हैं।
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शांतिपूर्ण तरीके से रखें बात
अनिरुद्धाचार्य ने धार्मिक विषयों पर अपनी बात रखते हुए इतिहास और धार्मिक स्थलों पर चर्चा (Aniruddhacharya Statement) को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखी जा सकती है, लेकिन समाज में प्रेम और भाईचारा बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। बम्हनीडीह में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान दिए गए उनके बयानों को लेकर अब धार्मिक और सामाजिक हलकों में चर्चा हो रही है। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।
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