सीजी भास्कर, 15 सितंबर। धरमजयगढ़ वन मंडल के बोरो परिक्षेत्र में झुंड से बिछड़े हाथी शावक को वन विभाग ने सुरक्षित रेस्क्यू (Elephant Calf Rescue) कर लिया है। करीब पांच दिनों तक शावक को उसके मूल झुंड से मिलाने की कोशिश की गई, लेकिन हाथियों के दल ने उसे स्वीकार नहीं किया। पैर में चोट और शारीरिक कमजोरी मिलने के बाद उसकी सुरक्षा को देखते हुए अब उसे सरगुजा के रमकोला हाथी रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया है।

अकेला मिला था हाथी का शावक Elephant Calf Rescue
9 सितंबर को ग्राम चाल्हा बाजार में एक हाथी शावक के अकेले घूमने की सूचना वन विभाग को मिली थी। सूचना मिलते ही वन अमला और हाथी मित्र दल मौके पर पहुंचा। स्थानीय पशु चिकित्सक से शावक का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया और उसे निर्धारित आहार देकर लगातार निगरानी में रखा गया।
10 सितंबर को वन विभाग की टीम ने शावक के मूल झुंड को करीब 7 से 8 किलोमीटर दूर ट्रैक किया। इसके बाद 11 और 12 सितंबर को शावक को झुंड के पास ले जाकर उसे वापस मिलाने का प्रयास किया गया, लेकिन दल ने उसे स्वीकार नहीं किया। झुंड से दोबारा अलग होने के बाद शावक वापस उसी क्षेत्र में लौट आया।
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ग्रामीणों की भीड़ से बढ़ी परेशानी
शावक के खेतों में घूमने की खबर फैलने के बाद उसे देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचने लगे। वन विभाग ने ग्राम चाल्हा और बताती में बैठक कर ग्रामीणों को शावक से दूरी बनाए रखने और सावधानी बरतने की समझाइश दी।
लगातार निगरानी के दौरान शावक की स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया।
बाएं पैर में मिली चोट, शरीर भी कमजोर
13 सितंबर को कानन पेंडारी बिलासपुर से वन्यप्राणी शल्यज्ञ और महावतों की टीम मौके पर पहुंची। विशेषज्ञों ने शावक की जांच की, जिसमें उसके बाएं पैर में चोट और शरीर में कमजोरी पाई गई।
चिकित्सकीय जांच और पिछले पांच दिनों के प्रयासों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि हाथियों का झुंड उसे स्वीकार नहीं कर रहा है। दूसरी ओर, शावक को देखने के लिए लगातार जुट रही भीड़ और उसकी कमजोर स्थिति को देखते हुए उसे खुले में छोड़ना भी सुरक्षित नहीं था।
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ट्रेंकुलाइज कर भेजा गया रमकोला
चिकित्सकीय सलाह के बाद शावक को ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित रेस्क्यू करने का निर्णय लिया गया। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के तहत आवश्यक अनुमति प्रक्रिया पूरी करने के बाद रेस्क्यू अभियान चलाया गया।
सोमवार को अचानकमार टाइगर रिजर्व, कानन पेंडारी और रमकोला के पशु चिकित्सकों व महावतों की टीम ने तय प्रक्रिया के अनुसार शावक को सुरक्षित रेस्क्यू किया। प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उसे विशेष वाहन से सरगुजा स्थित रमकोला हाथी रेस्क्यू सेंटर भेज दिया गया।
रेस्क्यू अभियान में वन विभाग के अधिकारियों, हाथी मित्र दल और स्थानीय ग्रामीणों ने भी सहयोग किया। अब रमकोला में विशेषज्ञों की निगरानी में शावक की देखभाल की जाएगी।
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