सीजी भास्कर, 22 सितंबर : उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों और विधान परिषद की 11 सीटों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। नवंबर में होने वाले चुनाव से पहले विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों ने दलों के बीच राज्यसभा चुनाव (UP Rajya Sabha Election 2026) का गणित काफी दिलचस्प बना दिया है। 25 नवंबर को यूपी कोटे की 10 राज्यसभा सीटों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। इनमें भाजपा की 8, समाजवादी पार्टी की 1 और बहुजन समाज पार्टी की 1 सीट शामिल है।
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25 नवंबर को खत्म होगा 10 का कार्यकाल
यूपी से राज्यसभा की जिन 10 सीटों पर कार्यकाल पूरा हो रहा है, उनमें भाजपा के आठ सदस्य शामिल हैं। इनमें बृजलाल, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, गीता शाक्य, हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, बीएल वर्मा और डॉ. दिनेश शर्मा के नाम शामिल हैं। दिनेश शर्मा अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल बनने के बाद राज्यसभा से इस्तीफा दे चुके हैं, इसलिए उनकी सीट भी चुनाव के जरिए भरी जाएगी। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और बसपा के रामजी गौतम का कार्यकाल भी 25 नवंबर को खत्म हो रहा है। इसके बाद बसपा के राज्यसभा में प्रतिनिधित्व खत्म होने की स्थिति बन जाएगी।
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397 विधायक तय करेंगे राज्यसभा का गणित
उत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल स्वीकृत सदस्य संख्या 403 है। फिलहाल छह सीटें रिक्त होने के कारण 397 विधायक ही सदन में हैं। विधानसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर भी मौजूदा सदस्य संख्या 397 दर्ज है। इनमें भाजपा के 256 और सपा के 101 विधायक हैं। 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव में एक सीट के लिए करीब 37 विधायकों के वोट का कोटा बनता है। इसी गणित के आधार पर राज्यसभा सीटों का गणित (UP Rajya Sabha Election 2026) दलों की मौजूदा संख्या के हिसाब से तैयार हो रहा है। सपा के 101 विधायक होने के कारण उसके पास दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या है और दो सीटों के बाद करीब 27 वोट बचने का गणित बनता है।
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भाजपा के पास 256 विधायक
भाजपा के पास विधानसभा में 256 विधायक हैं। वहीं अपना दल (सोनेलाल) के 13, राष्ट्रीय लोकदल के 9, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के 6 और निषाद पार्टी के 5 विधायक हैं। इन सहयोगी दलों को जोड़ने पर भाजपा नेतृत्व वाले गठबंधन की संख्या 289 तक पहुंचती है। इसके अलावा जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के दो विधायकों के समर्थन को भी इस गणित में शामिल किया जा रहा है।
कुछ राजनीतिक गणनाओं में निर्दलीय और अन्य समर्थक विधायकों को जोड़कर एनडीए समर्थित संख्या करीब 292 तक मानी जा रही है। हालांकि सुभासपा के विधायकों के रुख को लेकर अलग-अलग राजनीतिक आकलन सामने आ रहे हैं। इसलिए अंतिम गणित उम्मीदवारों और मतदान के समय स्पष्ट होगा।
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सात सीटों के बाद बचेंगे अतिरिक्त वोट
मौजूदा संख्या के आधार पर भाजपा और उसके सहयोगी दल सात उम्मीदवारों के लिए आवश्यक वोट जुटाने की स्थिति में दिखाई देते हैं। वहीं सपा के 101 विधायकों से दो सीटों का गणित बनता है। ऐसे में 10वीं सीट के लिए दूसरी वरीयता के वोट महत्वपूर्ण हो सकते हैं। यही वजह है कि राज्यसभा का सियासी गणित (UP Rajya Sabha Election 2026) आने वाले दिनों में और दिलचस्प होने की संभावना है। उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद निर्दलीय और छोटे दलों के विधायकों की भूमिका भी अहम हो सकती है।
अक्टूबर में जारी हो सकता है चुनाव कार्यक्रम
राज्यसभा चुनाव का कार्यक्रम अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में घोषित किए जाने की संभावना जताई जा रही है। सामान्य तौर पर अधिसूचना से लेकर मतदान और मतगणना तक करीब 20 दिन की प्रक्रिया होती है। नामांकन, नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी के बाद मतदान कराया जाता है। नवंबर में राज्यसभा की 10 सीटों के साथ उत्तर प्रदेश विधान परिषद की सीटों को लेकर भी सियासी गतिविधियां तेज रहेंगी। विधान परिषद की 11 सीटों पर भी चुनाव और चयन की प्रक्रिया पूरी होनी है।
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10वीं सीट पर दूसरी पसंद के वोट अहम
उत्तर प्रदेश की मौजूदा विधानसभा संख्या के हिसाब से दसवीं सीट का समीकरण (UP Rajya Sabha Election 2026) दूसरी वरीयता के वोटों पर निर्भर कर सकता है। भाजपा-एनडीए और सपा के बाद बचने वाले वोटों के साथ छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। इस चुनाव में दलों के लिए सिर्फ संख्या ही नहीं, बल्कि उम्मीदवारों का चयन और सहयोगी विधायकों का रुख भी महत्वपूर्ण रहेगा। नवंबर में होने वाले इस चुनाव को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की सियासी गतिविधियों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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