सीजी भास्कर, 05 अक्टूबर। कोरबा में जिला खनिज निधि न्यास से विकास कार्यों के लिए जारी (Korba DMF) की गई बड़ी रकम अब सवालों के घेरे में है। 2016-17 से 2024-25 के बीच 82 एजेंसियों को करीब 3564 करोड़ रुपए एडवांस दिए गए, लेकिन कई मामलों में राशि के इस्तेमाल और काम की वास्तविक स्थिति का पूरा हिसाब सामने नहीं आया है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 की आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट में भी एडवांस राशि को लेकर आपत्ति दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक इस अवधि में एजेंसियों को दिए गए 221.81 करोड़ रुपए से हुए कामों के खर्च का ऑडिट नहीं किया गया।

काम हुआ या नहीं, जांच पर सवाल Korba DMF
ऑडिट में सतरेंगा पर्यटन स्थल का मामला भी सामने आया। 2019-20 में सामुदायिक शौचालय को मंजूरी दी गई थी और 2020-21 में करीब 10 लाख रुपए खर्च कर ढांचा तैयार किया गया। हालांकि, वहां पानी की व्यवस्था नहीं हो सकी।
इसी तरह शौचालय के सामने करीब 10 लाख रुपए की लागत से प्रतीक्षालय बनाया गया, लेकिन पर्यटकों के बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की बात सामने आई। ऑडिट में कहा गया कि केवल भुगतान और लेखा रिकॉर्ड से काम पूरा होने की पुष्टि नहीं हो सकती। इसके लिए स्थल का भौतिक सत्यापन, माप पुस्तिका और कार्य पूर्णता की जांच जरूरी है।
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बिना योजना के फिर जारी हुआ एडवांस
सिविल सर्जन के खाते में एक अप्रैल 2022 को करीब 4.48 करोड़ रुपए (Korba DMF) मौजूद थे। इसके बाद इतनी ही राशि दोबारा एडवांस के तौर पर जारी कर दी गई। कार्ययोजना नहीं होने के कारण सिविल सर्जन ने 31 मार्च 2023 से पहले कुल 8.97 करोड़ रुपए वापस कर दिए।
अन्य एजेंसियों से भी एडवांस राशि वापस की गई। 2024-25 में करीब 20.82 करोड़, 2023-24 में 12.57 करोड़ और 2022-23 में 47.57 करोड़ रुपए वापस किए गए।
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PWD और PHE के जवाब से उठे सवाल
निर्माण एजेंसियों की भूमिका को लेकर भी सवाल सामने आए हैं। लोक निर्माण विभाग ने बताया कि DMF से हुए खर्च का अलग से हिसाब नहीं रखा जाता। वहीं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने कहा कि DMF का अब तक ऑडिट नहीं हुआ है।
कोरबा कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि DMFT की प्राप्तियों और खर्च का हर साल नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक से सूचीबद्ध चार्टर्ड अकाउंटेंट के माध्यम से ऑडिट कराया जाता है।
पूर्व प्रभारी मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि एजेंसी और एडवांस राशि तय करने का काम अधिकारियों की समिति (Korba DMF) करती थी और उनकी भूमिका समिति में जनप्रतिनिधि के तौर पर थी। वहीं 2024-25 में कोरबा कलेक्टर रहे अजीत वसंत ने कहा कि वर्तमान में सरगुजा में पदस्थ होने के कारण उन्हें ऑडिट आपत्ति की आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है।
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