सीजी भास्कर, 6 अक्टूबर : चार महीने के सफर के बाद आखिरकार प्रदेश से मानसून की विदाई हो गई है। इस बार बारिश ने कहीं किसानों और जलाशयों को राहत दी तो कहीं बाढ़ और जलभराव ने मुश्किलें बढ़ाईं। सीजन खत्म होने के बाद भी कई इलाकों में बारिश के असर की तस्वीर साफ नजर आ रही है।
इस मानसून में प्रदेश में औसतन 1155.3 मिमी बारिश (Monsoon Departure) दर्ज हुई। यह सामान्य बारिश के मुकाबले 2.1 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, पूरे प्रदेश में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहा। कुछ जिलों में अतिवृष्टि हुई तो कुछ क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई।
बलरामपुर में सबसे ज्यादा बारिश
बारिश के मामले में बलरामपुर सबसे आगे रहा। यहां औसतन 1556.6 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य के मुकाबले 165.3 प्रतिशत है। इसके विपरीत बेमेतरा में सबसे कम बारिश हुई। यहां 674.9 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य का सिर्फ 80.4 प्रतिशत है। इससे मानसून की बारिश (Monsoon Departure) के असमान वितरण की तस्वीर साफ होती है।
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बिलासपुर में जलप्रलय
मानसून के दौरान एक दिन हुई रिकॉर्ड बारिश ने बिलासपुर में हालात बिगाड़ दिए। कुछ ही घंटों में शहर के बड़े हिस्से में पानी भर गया। निचले इलाकों में जलभराव से जनजीवन प्रभावित हुआ और कई इलाकों में प्रशासनिक तैयारियों पर भी सवाल उठे। भारी बारिश के कारण बिलासपुर में जलभराव (Monsoon Departure) की स्थिति गंभीर हो गई थी। सड़कों और निचले इलाकों में पानी भरने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
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बस्तर में बाढ़ का कहर
बस्तर संभाग में भी भारी बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर आ गए। कई गांव बाढ़ की चपेट में आए और लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा। कुछ इलाकों में आवागमन भी प्रभावित हुआ। अत्यधिक बारिश ने बस्तर में बाढ़ (Monsoon Departure) के हालात पैदा किए। ओडिशा की ओर से आए पानी के कारण भी कुछ इलाकों में मुश्किलें बढ़ीं और ग्रामीणों को मदद मांगनी पड़ी।
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बांधों में भरपूर पानी
मानसून की विदाई के समय प्रदेश के बड़े जलाशयों में पर्याप्त पानी जमा है। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 12 प्रमुख बड़े जलाशय 92.54 प्रतिशत और 34 मध्यम जलाशय 95.78 प्रतिशत तक भर चुके हैं। मणियारी, तांदुला, मुरुमसिल्ली, खारंग और रविशंकर सागर यानी गंगरेल जैसे प्रमुख जलाशयों में भी अच्छा जलभराव है। जलाशयों में बढ़ा जलस्तर (Monsoon Departure) आने वाले समय में पेयजल और रबी फसलों के लिए राहत दे सकता है।
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रायपुर में 1307 मिमी बारिश
राजधानी में भी मानसून के दौरान कई बार भारी बारिश से हालात बिगड़े। निचले इलाकों और कॉलोनियों में जलभराव हुआ। कई जगह नाले उफान पर आने से लोगों को परेशानी हुई और यातायात प्रभावित हुआ। रायपुर में इस सीजन 1307.4 मिमी बारिश (Monsoon Departure) दर्ज की गई, जो सामान्य का 135.4 प्रतिशत है। यानी राजधानी में भी बारिश सामान्य से काफी ज्यादा रही।
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कहीं राहत तो कहीं नुकसान
इस मानसून ने प्रदेश को कुल मिलाकर सामान्य से ज्यादा बारिश दी, लेकिन इसका वितरण असमान रहा। बलरामपुर में अतिवृष्टि जैसी स्थिति रही तो बेमेतरा में बारिश सामान्य से कम रही। सूरजपुर, बलौदाबाजार, महासमुंद, धमतरी, मुंगेली, दुर्ग, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कोंडागांव और दंतेवाड़ा में सामान्य बारिश दर्ज की गई। कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ में मानसून की विदाई (Monsoon Departure) राहत और नुकसान दोनों की तस्वीर छोड़ गई है। जलाशयों में पर्याप्त पानी से रबी सीजन और पेयजल को राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन बाढ़ और अतिवृष्टि से प्रभावित इलाकों में नुकसान की भरपाई अब बड़ी चुनौती होगी।
बारिश के प्रमुख आंकड़े
- प्रदेश में औसत बारिश: 1155.3 मिमी
- सामान्य के मुकाबले: 102.1%
- सबसे ज्यादा बारिश: बलरामपुर – 1556.6 मिमी
- सबसे कम बारिश: बेमेतरा – 674.9 मिमी
- रायपुर: 1307.4 मिमी
- 12 बड़े जलाशय: 92.54% भरे
- 34 मध्यम जलाशय: 95.78% भरे
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