सीजी भास्कर, 6 अक्टूबर : सरकारी योजनाओं और प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। कई कर्मचारियों को लगातार चार से पांच महीने तक वेतन नहीं मिलने की शिकायत सामने आई है। लंबे समय से भुगतान अटकने के कारण कर्मचारियों के सामने घर का खर्च चलाने का संकट खड़ा हो गया है।
वेतन में देरी का असर अब कामकाज पर भी पड़ने लगा है। कर्मचारियों का दावा है कि आर्थिक परेशानी के चलते कई लोगों ने नौकरी तक छोड़ दी है। चार-पांच महीने से वेतन अटका (Chhattisgarh Salary Crisis) होने के कारण कर्मचारी समय पर भुगतान की मांग कर रहे हैं।
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प्रोजेक्ट कर्मचारियों का वेतन अटका
नगरीय निकायों में केंद्र प्रायोजित योजनाओं और अलग-अलग प्रोजेक्ट के तहत बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी काम कर रहे हैं। इनमें कई कर्मचारी नियमित सरकारी सेवा में नहीं हैं। उनका वेतन संबंधित योजना, प्रोजेक्ट, निकाय के बजट और भुगतान प्रक्रिया पर निर्भर रहता है। कर्मचारियों का आरोप है कि फाइल और भुगतान प्रक्रिया में देरी के कारण योजना कर्मचारियों का वेतन (Chhattisgarh Salary Crisis) समय पर जारी नहीं हो पा रहा है। लंबे समय तक भुगतान नहीं होने से कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
वेतन नहीं मिला तो छोड़ी नौकरी
लगातार वेतन नहीं मिलने का असर कर्मचारियों की संख्या पर भी पड़ा है। कर्मचारियों का दावा है कि कई लोग बिना वेतन लंबे समय तक काम नहीं कर सके और उन्होंने नौकरी छोड़ दी। कर्मचारियों की कमी से योजनाओं और प्रोजेक्ट के काम की निरंतरता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। वेतन संकट से नौकरी छोड़ने (Chhattisgarh Salary Crisis) का दावा कर्मचारियों की परेशानी को सामने लाता है।
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कभी दो तो कभी तीन महीने
कर्मचारियों का कहना है कि वेतन भुगतान में देरी की समस्या नई नहीं है। अलग-अलग नगरीय निकायों में प्रोजेक्ट और अनियमित कर्मचारियों को कभी दो तो कभी तीन महीने के अंतराल पर वेतन मिलने की स्थिति बनती रही है। इस संबंध में कर्मचारियों ने अधिकारियों और विभागीय स्तर पर कई बार शिकायत किए जाने की बात कही है। उनका कहना है कि अनियमित वेतन भुगतान (Chhattisgarh Salary Crisis) के कारण आर्थिक योजनाएं बनाना मुश्किल हो जाता है।
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निर्देश के बाद भी परेशानी
सूत्रों के मुताबिक, समय पर वेतन भुगतान को लेकर संबंधित मंत्री की ओर से अधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद भुगतान व्यवस्था में स्थायी सुधार नहीं होने का दावा किया जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन के लिए उन्हें बार-बार संबंधित अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। वेतन भुगतान में देरी (Chhattisgarh Salary Crisis) को लेकर स्थायी व्यवस्था बनाने की मांग की जा रही है।
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4 लाख से ज्यादा कर्मचारी
जानकारी के अनुसार प्रदेश के अलग-अलग विभागों में चार लाख से अधिक अनियमित कर्मचारी, प्लेसमेंट कर्मचारी और संविदाकर्मी काम कर रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि वेतन भुगतान से जुड़ी फाइलें कई बार लंबे समय तक लंबित रहती हैं। कुछ कर्मचारियों ने अधिकारियों पर एजेंसियों से कमीशन के कारण फाइलें रोकने का आरोप भी लगाया है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए फाइल अटकने के आरोप (Chhattisgarh Salary Crisis) को कर्मचारियों के दावे के तौर पर ही देखा जा रहा है।
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उधार से घर चलाने का दावा
चार से पांच महीने तक वेतन नहीं मिलने की स्थिति में कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें उधार लेकर घर का खर्च चलाना पड़ रहा है। बच्चों की पढ़ाई, किराया, राशन और दूसरे जरूरी खर्चों को लेकर भी परेशानी बढ़ने का दावा किया जा रहा है। कर्मचारियों की मांग है कि योजनाओं और प्रोजेक्ट में काम करने वालों के लिए नियमित और समयबद्ध वेतन भुगतान की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। समय पर वेतन की मांग (Chhattisgarh Salary Crisis) इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कर्मचारियों के मुताबिक भुगतान में देरी का असर सरकारी योजनाओं और प्रोजेक्ट के काम पर भी पड़ रहा है।
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