सीजी भास्कर, 6 अक्टूबर : खरीफ फसल की वास्तविक स्थिति और खेतों में बोई गई फसलों का सटीक रिकॉर्ड तैयार करने के लिए इस बार गिरदावरी का काम अक्टूबर में पूरा किया जाएगा। खेत-खेत जाकर फसल की स्थिति दर्ज करने के साथ रिकॉर्ड को तकनीक से भी जोड़ा जा रहा है।
इस बार खरीफ गिरदावरी (Kharif Girdawari 2026) में ड्रोन और जियो मैपिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे खेत की लोकेशन, रकबा और बोई गई फसल का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। साथ ही गांजा और अफीम जैसी मादक फसलों की अवैध खेती की आशंका वाले क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी।
साल की पहली बड़ी तस्वीर 22 सितंबर तक सामने आ चुकी है। इस तारीख तक करीब 48.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों की बोनी पूरी हो चुकी थी। धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली और रामतिल प्रमुख फसलें हैं।
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ड्रोन से जियो मैपिंग
प्रशासन ने इस बार गिरदावरी की प्रक्रिया में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया है। कई क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए खेतों की जियो मैपिंग कराई जा रही है। इससे खेतों की लोकेशन और फसल क्षेत्रफल का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। ड्रोन से मिलने वाली जानकारी को मैदानी अमले की रिपोर्ट से मिलाया जाएगा। इस तरह डिजिटल गिरदावरी (Kharif Girdawari 2026) के जरिए रिकॉर्ड में दर्ज फसल और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान किया जा सकेगा।
रकबे का होगा सत्यापन
गिरदावरी रिपोर्ट तैयार होने के बाद राजस्व अधिकारी इसकी लगातार समीक्षा करेंगे। खेत में दर्ज फसल और मौके पर मौजूद फसल में अंतर मिलने पर संबंधित अमले से जानकारी ली जाएगी। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि फसल का रकबा और किस्म सही तरीके से दर्ज हो। इससे आगे चलकर सरकारी योजनाओं, फसल बीमा, मुआवजा और कृषि संबंधी योजनाओं का लाभ सही हितग्राहियों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
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गांजा-अफीम पर नजर
गिरदावरी के दौरान मादक फसलों की अवैध खेती की आशंका वाले इलाकों पर भी विशेष नजर रखी जा रही है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों को चिन्हित कर राजस्व और पुलिस विभाग के स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है। ड्रोन सर्वे में किसी संदिग्ध फसल की पहचान (Kharif Girdawari 2026) होने पर मैदानी स्तर पर सत्यापन कराया जा सकता है। इससे अवैध गांजा और अफीम की खेती के खिलाफ कार्रवाई के लिए भी प्रशासन को मदद मिलने की उम्मीद है।
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48.44 लाख हेक्टेयर में बोनी
22 सितंबर तक प्रदेश में 48.44 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों की बोनी पूरी हो चुकी थी। इस बार कुल 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा गया है। धान सबसे प्रमुख खरीफ फसल है। इसके अलावा मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली और रामतिल जैसी फसलें भी खेतों में बोई गई हैं। खरीफ फसल का डिजिटल रिकॉर्ड (Kharif Girdawari 2026) तैयार होने के बाद फसलवार आंकड़ों की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
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अक्टूबर में पूरा होगा काम
गिरदावरी पूरी होने के बाद तैयार रिपोर्ट की समीक्षा की जाएगी। इसके आधार पर फसलवार और क्षेत्रवार वास्तविक आंकड़े सामने आएंगे। प्रशासन को इससे खरीफ सीजन की स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी। ड्रोन सर्वे, जियो मैपिंग और मैदानी सत्यापन को साथ लेकर खरीफ गिरदावरी की पूरी प्रक्रिया (Kharif Girdawari 2026) को अधिक सटीक बनाने की कोशिश की जा रही है। अक्टूबर में काम पूरा होने के बाद इसका विस्तृत रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।



