सीजी भास्कर, 8 अक्टूबर : छत्तीसगढ़ के छोटे शहरों और गांवों के युवाओं में वायुसेना में करियर बनाने की रुचि (Chhattisgarh Air Force Aspirants) लगातार बढ़ रही है। इसके बावजूद हर साल प्रदेश से अग्निवीर वायु में करीब 25 से 30 युवाओं का ही चयन हो पाता है। 2025 में यह संख्या करीब 15 रही। अंग्रेजी में न्यूनतम अंक, कठिन परीक्षा, मेडिकल और दूसरे राज्यों में होने वाले चयन चरण युवाओं के सामने बड़ी चुनौती हैं।
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अंग्रेजी में 50 प्रतिशत अंक पहली बड़ी बाधा
अग्निवीर वायु के लिए अंग्रेजी में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक की अनिवार्यता कई विद्यार्थियों के लिए मुश्किल बनती है। कई स्कूलों में बेहतर परिणाम के लिए विद्यार्थियों को अंग्रेजी के बजाय दूसरे विषय लेने की सलाह दी जाती है। ऐसे में 12वीं में अच्छे अंक होने के बावजूद कई विद्यार्थी आवेदन के लिए पात्र नहीं हो पाते। आवेदन शुल्क भी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों के लिए चुनौती बनता है। इसके बाद गणित, अंग्रेजी, भौतिकी और रसायन विज्ञान की लिखित परीक्षा समेत चयन के कई चरणों से गुजरना पड़ता है।
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परीक्षा से मेडिकल तक दूसरे राज्यों की दौड़
लिखित परीक्षा में सफल उम्मीदवारों को शारीरिक परीक्षण के लिए भोपाल, इंदौर या जबलपुर जैसे शहरों तक जाना पड़ सकता है। मेडिकल प्रक्रिया के लिए पुणे, नासिक और बेंगलुरु जैसे शहरों की यात्रा करनी पड़ सकती है। दूसरे राज्यों में परीक्षा और मेडिकल के लिए जाना (Chhattisgarh Air Force Aspirants) आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त चुनौती बन जाता है। यात्रा, ठहरने और खाने का खर्च भी परिवार पर पड़ता है। छोटे शहरों के विद्यार्थियों को कई बार चयन प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों की जानकारी भी समय पर नहीं मिल पाती।
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अब सिर्फ फाइटर जेट तक सीमित नहीं एयरफोर्स
आधुनिक वायुसेना में फाइटर जेट उड़ाने के साथ तकनीकी क्षेत्रों की भूमिका भी तेजी से बढ़ रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, साइबर सिक्योरिटी, कम्युनिकेशन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा एनालिसिस, एविएशन टेक्नोलॉजी और एडवांस इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में भी अवसर हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक सैन्य अभियानों में तकनीक और एआई की भूमिका बढ़ने से युवाओं को गणित, भौतिकी, कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, अंग्रेजी और तकनीकी कौशल पर भी मजबूत पकड़ बनानी चाहिए।
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हाइट की बाधा को हराकर हासिल किया लक्ष्य
गुढ़ियारी निवासी सौरभ तिवारी के पिता निजी फैक्ट्री में नौकरी करते हैं। सौरभ का सपना सेना में जाने का था, लेकिन कम हाइट के कारण कई भर्तियों में उनका चयन नहीं हो पाया। उन्होंने एयरफोर्स की परीक्षा तीन बार और नेवी की परीक्षा दो बार दी। कई बार कुछ अंकों से मेरिट में जगह नहीं बना पाए। इसके बावजूद उन्होंने प्रयास जारी रखा और आखिरकार एयरफोर्स में चयन हासिल किया। सौरभ की कहानी (Chhattisgarh Air Force Aspirants) के लिए तैयारी कर रहे युवाओं को लगातार प्रयास करने की सीख देती है।
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पिता के निधन के बाद भी जयंत ने नहीं छोड़ा लक्ष्य
बिल्हा निवासी जयंत सोनवानी के पिता ऑटो चलाते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और जयंत की अंग्रेजी भी कमजोर थी। नेवी से सेवानिवृत्त अधिकारी से मार्गदर्शन लेकर उन्होंने तैयारी शुरू की। एनडीए की पहली लिखित परीक्षा में असफल होने के बाद उन्होंने दोबारा प्रयास किया। लिखित परीक्षा पास की, लेकिन एसएसबी के अलग-अलग चरणों में बाहर होते रहे। नेवी और एयरफोर्स की मेरिट में भी जगह नहीं बना पाए। मेडिकल में नॉक-नी, फ्लैट फुट, माइनस 1.5 नंबर का चश्मा और हाथों के एंगल से जुड़ी समस्या सामने आई। इसी दौरान पिता का निधन हो गया। परिवार चलाने के लिए उन्होंने डिलीवरी बॉय और फैक्ट्री में काम भी किया। इसके बावजूद तैयारी जारी रखी और आखिरकार एयरफोर्स की अंतिम मेरिट में चयन हासिल किया। वर्तमान में वे चेन्नई में पोस्टेड हैं।
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एयरफोर्स का सपना पूरा किया
अभनपुर के बिरोंदा गांव के भूपेंद्र साहू के पिता किसान हैं। परिवार के अनुसार, भूपेंद्र लंबे समय तक मोबाइल पर फ्री-फायर गेम खेलते थे। बहन की एक बात ने उनकी दिशा बदल दी। उन्होंने कहा कि नकली फाइटर बनने से बेहतर है असली फाइटर बनो। इसके बाद भूपेंद्र ने फोर्स (Chhattisgarh Air Force Aspirants) में जाने की तैयारी शुरू की। आर्मी टेक्निकल में असफल हुए और नेवी में भी पहली कोशिश में चयन नहीं हुआ। दूसरी कोशिश में नेवी में चयन हुआ और ट्रेनिंग शुरू की। नेवी की आधी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद भी उन्होंने एयरफोर्स में जाने का सपना नहीं छोड़ा। आखिरकार उनका एयरफोर्स में चयन हुआ। इन कहानियों से साफ है कि चयन की राह कठिन जरूर है, लेकिन सही मार्गदर्शन, लगातार तैयारी और तकनीकी कौशल के साथ छत्तीसगढ़ के युवा भी आसमान में अपनी जगह बना सकते हैं।



