सीजी भास्कर, 9 अक्टूबर : छत्तीसगढ़ में नक्सल प्रकरणों की वापसी की प्रक्रिया (Chhattisgarh Naxal Cases Withdrawal) तेज की जाएगी। उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पात्र मामलों में नियमानुसार और समयबद्ध कार्रवाई की जाए। गंभीर अपराध, जनहानि और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA से जुड़े मामलों को छोड़कर अन्य पात्र प्रकरणों की वापसी की प्रक्रिया जल्द पूरी करने पर जोर दिया गया है।
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15 दिनों में जिला समितियों की बैठक
नवा रायपुर स्थित महानदी भवन में हुई बैठक में नक्सल प्रकरणों की वापसी (Chhattisgarh Naxal Cases Withdrawal) से जुड़े आवेदनों की जिलावार और प्रकरणवार समीक्षा की गई। गृह मंत्री ने अधिकारियों से लंबित मामलों की स्थिति पूछी और प्रक्रिया को जल्द अंतिम रूप देने के निर्देश दिए। सभी संबंधित जिलों में जिला स्तरीय समितियों की बैठक अगले 15 दिनों के भीतर आयोजित करने को कहा गया है। वहीं, राज्य स्तरीय समिति की बैठक 5 नवंबर तक पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।
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करीब 900 पुनर्वासित लौटे
अन्य राज्यों में आत्मसमर्पण करने वाले छत्तीसगढ़ के निवासियों की वापसी और पुनर्वास की भी समीक्षा हुई। अधिकारियों को निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया के तहत ऐसे लोगों को राज्य वापस लाने के निर्देश दिए गए हैं।
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक करीब 900 पुनर्वासित लोग छत्तीसगढ़ लौट चुके हैं। उन्होंने उन्हें मोबाइल फोन और प्रशिक्षण किट उपलब्ध कराने के साथ पहचान पत्र और राशन कार्ड बनवाने के निर्देश दिए। पुनर्वास केंद्रों में उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार आजीविका से जुड़ा प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया गया।
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लंबित इनाम राशि का निराकरण
आत्मसमर्पित नक्सलियों को मिलने वाली इनाम राशि और पुनर्वास सहायता के लंबित मामलों (Chhattisgarh Naxal Cases Withdrawal) की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को अगले महीने होने वाली समीक्षा बैठक से पहले लंबित प्रकरणों पर चर्चा कर उनका निराकरण सुनिश्चित करने को कहा गया। पुनर्वास नीति के तहत पात्र लोगों को भूमि, आवास, रोजगार और आर्थिक सहायता समय पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। इसके अलावा सभी पात्र पुनर्वासितों के आयुष्मान कार्ड और राशन कार्ड बनवाने पर भी जोर दिया गया।
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शहीद जवानों के परिवारों को राहत
बैठक में वर्ष 2001 से अब तक नक्सल घटनाओं में शहीद जवानों के परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति और अन्य निर्धारित लाभ देने की स्थिति की समीक्षा हुई। गृह मंत्री ने लंबित मामलों का परीक्षण कर नियमानुसार जल्द निराकरण करने के निर्देश दिए। नक्सल हिंसा में मारे गए आम नागरिकों के आश्रित परिवारों को आर्थिक सहायता और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ घायल जवानों और नागरिकों के उपचार की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई।
शहीदों की स्मृति में बनेंगे स्मारक
नक्सल घटनाओं में शहीद जवानों और मृत नागरिकों की स्मृति में बनने वाले स्मारकों को जनोपयोगी स्वरूप देने पर जोर दिया गया। गृह मंत्री ने यात्री प्रतीक्षालय और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को स्मारकों से जोड़ने के निर्देश दिए। जहां बड़ी संख्या में जवानों या आम नागरिकों की मौत हुई है, वहां बड़े स्मारक बनाए जाएंगे। इन स्थानों पर संबंधित घटना, शहीद जवानों और मृत नागरिकों से जुड़ी जानकारी भी प्रदर्शित की जाएगी। इसके अलावा पंचायत भवन, सामुदायिक भवन, आंगनबाड़ी, सड़क, चौक-चौराहों, बाजार और स्कूल मैदानों का नामकरण शहीदों के नाम पर करने की प्रक्रिया अगले महीने तक पूरी करने को कहा गया।
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गांवों के विकास की समीक्षा
बैठक में इलवद पंचायत के लंबित विकास कार्यों की समीक्षा की गई। अधिकारियों को ग्रामीणों की वास्तविक जरूरतों और मांगों के अनुसार विकास कार्यों को मंजूरी देने के निर्देश दिए गए। बस्तर में ऐसे गांवों की पहचान करने को भी कहा गया, जहां अब तक खेती में रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल नहीं हुआ है। धान खरीदी शुरू होने से पहले इन गांवों में आवश्यक व्यवस्थाएं करने और महिला स्वसहायता समूहों को स्थानीय कृषि उत्पादों से जोड़कर रोजगार के अवसर विकसित करने पर जोर दिया गया।
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श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर जोर
नवरात्रि में मां दंतेश्वरी के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों को दर्शनार्थियों के लिए जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। बैठक में प्रमुख सचिव निहारिका बारीक, गृह सचिव नेहा चंपावत, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एस.आर.पी. कल्लूरी और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेकानंद सिन्हा सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बस्तर, कोंडागांव, कबीरधाम, राजनांदगांव, महासमुंद, सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, दुर्ग और बलरामपुर के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और संबंधित अधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।
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